दुनिया भर में केंद्रीय बैंक अपनी बात को गोलमोल तरीके से पेश करने के लिए जाने जाते रहे हैं। भारतीय रिजर्व बैंक भी बहुत सी बातों को समझाने के लिए डोविश (कपोत), हॉकिश (बाज) या आउल (धन की देवी का वाहन) जैसे प्रतीकों का प्रयोग करता रहा है।
इन दिनों आरबीआई और उसके प्रमुख के वक्तव्यों व संकेतों पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों को अपनी शब्दावली और ज्ञान का दायरा बढ़ाने के लिए इतिहास, साहित्य और शब्दकोश के नए पन्ने पलटने पड़ रहे हैं। उन्हें हाल में इसी क्रम में अंग्रेजी के सबसे बड़े शब्दों में से एक का अर्थ समझने से लेकर फ्रांस के दार्शनिक वॉल्तेयर द्वारा गढ़े गए चरित्रों को पढ़ने की चुनौती का सामना करना पड़ा है।
रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास हों या मौद्रिक नीति समिति के सदस्य चेतन घाटे हों, रिजर्व बैंक के नीति नियंताओं ने नीतिगत घोषणाओं के क्रम में अपने शब्दज्ञान से विश्लेषकों को शब्दकोश तथा वॉल्तेयर की कैंडिड जैसी रचनाओं के पन्ने पलटने पर मजबूर किया है।
इससे अमेरिका के फेडरल रिजर्व के उस दौर की याद आ गई जब एलन ग्रीनस्पैन उसके गवर्नर हुआ करते थे। ग्रीनस्पैन ने फेडरल रिजर्व के 17 साल के गवर्नर के कार्यकाल में कठिन शब्दों और पुराने दर्शनों को पलटने के कारण अलग ही ख्याति प्राप्त की थी।
इन दिनों भारत में भी विश्लेषकों और समीक्षकों के लिये ग्रीनस्पैन का अमेरिकी जमाना लौट आया है। रिजर्व बैंक की हालिया मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक का ब्यौरा 21 अगस्त को जारी हुआ। इसमें चेतन घाटे ने अंग्रेजी के एक शब्द ‘फ्लॉक्सीनौसीनिहिलीपिलिफिकेशन’ का प्रयोग किया। ऑक्सफोर्ड शब्दकोश के अनुसार इस शब्द का अर्थ किसी चीज को अर्थहीन मानने या हल्के ढंग से लेने की आदत है। अंग्रेजी के 29 वर्ण का यह शब्द लैटिन के चार शब्दों फ्लाक्सी, नौसी, निहिली और पिलि से मिलकर बना है।
घाटे ने उसमें कहा है कि आर्थिक वृद्धि के अनुमान भले ही फ्लॉक्सीनौसीनिहिलीपिलिफिकेशन के शिकार हो गये हों बावजूद इसके आर्थिक वृद्धि रफ्तार पकड़ रही है।