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मोदी सरकार के फरमान का दिखा असर, इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर के आए 'अच्छे दिन'

Thu, 11 May 2017 02:49 PM IST
amarujala.com- Presented by: पवन नाहर
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narendra modi - फोटो : narendra modi
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इफ्रास्ट्रक्चर प्रॉजेक्ट्स की बात की जाए, तो जवनरी में 1201 प्रॉजेक्ट्स में से एक-तिहाई देरी चल रहे थे। इन प्रॉजेक्ट्स की कुल कीमत 16.9 खरब रुपये बताई जा रही है। मगर ब्लूमबर्ग न्यूज के अनुसार सरकार की एक रिपोर्ट में इस आंकड़े में 43 फीसदी की कमी आई है। इसके अलावा इन प्रॉजेक्ट्स के अतिरिक्त खर्चों में भी भारी गिरावट आई है।
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1.5 अरब की कीमत वाले 329 प्रॉजेक्ट अपने शेड्यूल से पीछे चल रहे है, 293 में लागत अधिक है और 95 में दोनों ही हैं। 2014 में सरकार बनाते ही पीएम मोदी ने इंफ्रास्ट्रक्चर की ओर बड़े कदम बढ़ाए थे। हालांकि, कोयला, पावर, पेट्रोलियम, रेलवे और रोड के ज्यादातर प्रॉजेक्ट्स अपने शेड्यूल से पीछे चल रहे हैं। इसके पीछे वजह है कि इनके लिए पैसा, जमीन और प्रशासन से इजाजत जुचा पाना कठिन होता है।
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'भारत को अब भी है 4.1 लाख करोड़ की जरूरत'

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली - फोटो : अमर उजाला
प्रसिद्ध कंसल्टेंसी फर्म प्राइसवॉटरकूपर्स इंडिया के वरिष्ठ अधिकारी मनीष अग्रवाल ने कहा है कि सरकार ने चीजों को आसान किया है। सरकार की नियत साफ दिखाई पड़ रही है और इसका असर वास्तिकता पर भी दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा सरकार अपने ओर से निवेश बढ़ा रही है, ठप्प पड़ी योजनाओं को पूरा करने और नए परियोजनाओँ की घोषणा कर रही है। इसके अलावा सरकार का नॉन परफॉर्मिंग एसेट घटाने और निजी निवेश पर भी जोर है।

26 अप्रैल को हुई रिव्यू बैठक में मोदी सरकार ने संगठित अप्रोच की ओर इशारा किया था। वित्त मंत्री अरुण जेटली की मानें तो भारत को अगले 5 सालों में 4.1 लाख करोड़ रुपये के निवेश की जरूरत है, ताकि उसकी इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग को पूरा किया जा सके।
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