शेयर बाजारों में तेजी के दम पर निवेशकों ने पिछले साल प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) में निवेश कर मोटा मुनाफा कमाया। इस सप्ताह भी तीन कंपनियां 6,400 करोड़ रुपये जुटाने के लिए आईपीओ लाने वाली हैं, जिनमें पैसे लगाकर आप कमाई कर सकते हैं। ये तीनों कंपनियां हैं...आधार हाउसिंग फाइनेंस, इंडिजेन और टीबीओ टेक।
आईपीओ में मिले शेयरों को लिस्टिंग के दिन या उसके कुछ दिनों बाद बेचकर मुनाफा कमाते हैं तो टैक्स भरना होगा। कर विशेषज्ञों का कहना है कि आवंटित शेयरों की बिक्री पर कर देनदारी उतनी ही बनती है, जितनी किसी सूचीबद्ध शेयर से कमाई पर।
मुनाफा एक लाख रुपये से ज्यादा तो बनेगी कर देनदारी
आईपीओ के सूचीबद्ध होने के बाद ही मुनाफे पर टैक्स देनदारी की गणना होती है। शेयरों की बिक्री से होने वाला लाभ अगर एक लाख रुपये से ज्यादा हुआ तो टैक्स चुकाना पड़ेगा।
सूचीबद्ध होने के एक साल के भीतर आईपीओ में मिले शेयरों को बेचकर लाभ कमाते हैं तो 15 फीसदी शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स (एसटीसीजी) टैक्स भरना होगा। इस पर 4 फीसदी उपकर भी लगेगा।
अगर एक साल के बाद शेयर बेचकर मुनाफा बनाते हैं तो 10 फीसदी लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (एलटीसीजी) टैक्स देना होगा।
ऐसे समझें गणित
अगर आपने आईपीओ में 500 रुपये के भाव पर 50 शेयर खरीदा। एक साल के भीतर इसे 800 रुपये के भाव पर बेच दिया। इस तरह, आपको 15,000 रुपये का शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स प्राप्त हुआ।
इस कमाई पर 15 फीसदी की दर से 2,250 रुपये टैक्स देना होगा। 4 फीसदी यानी 90 रुपये उपकर भी लगेगा। इस तरह, कुल कर देनदारी 2,340 रुपये बनेगी।
इसी भाव पर शेयर एक साल बाद बेचते हैं तो मुनाफे पर 10 फीसदी एलटीसीजी भरना होगा, जो 1,500 रुपये बनता है।
शेयर होल्डिंग अवधि की शुरुआत निवेश की तारीख से नहीं बल्कि शेयर आवंटन तारीख से होती है। यानी मुनाफे पर कर की गणना आईपीओ में आवंटित शेयर की तारीख से होगी।
शेयर बिक्री से हुए घाटे की कर सकते हैं भरपाई
आईपीओ के सूचीबद्ध होने के बाद शेयरों की कीमत खरीद भाव से नीचे चली जाती है तो इस घाटे की भरपाई अन्य शेयरों में हुए मुनाफे के साथ कर सकते हैं। अगर छोटी अवधि में बेचे शेयरों में नुकसान हुआ है तो इसी अवधि में एक साल पहले बेचे गए अन्य शेयरों के लाभ से इसे समायोजित कर टैक्स संबंधी भरपाई कर सकते हैं। हालांकि, एलटीसीजी पर भरपाई की सुविधा नहीं है।
-बलवंत जैन, कर एवं निवेश सलाहकार