अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने इस सप्ताह नवीनतम वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट जारी की है, जिसमें इस साल वैश्विक मुद्रास्फीति में गिरावट आने की भविष्यवाणी की गई है।
रिपोर्ट में कहा गया, जीवन यापन की लागत के संकट के बीच ज्यादातर अर्थव्यवस्थाओं की प्राथमिकता मुद्रास्फीति (महंगाई) की दर में गिरावट हासिल करना है। इसमें आगे कहा गया है, कठिन मौद्रिक स्थितियों से निपटने के लिए ऋण पुनर्गठन ढांचे को मजबूत करना जरूरी है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि यूक्रेन में युद्ध और मुद्रास्फीति से लड़ने के लिए केंद्रीय बैंक की दरों में वृद्धि आर्थिक गतिविधि को बाधित करने वाले कारक हैं। इसमें यह भी कहा गया है कि चीन में कोरोना महामारी को लेकर लगाए सख्त लॉकडाउन और प्रतिबंधो में ढील देने से वैश्विक विकास को बढ़ावा मिल सकता है।
इसमें आगे कहा गया है, यूक्रेन में चल रहे युद्ध, कोरोना महामारी और अन्य भू-राजनीतिक मुद्दों से पैदा हुई रसद चुनौतियों (विशेष रूप से उर्जा वस्तुओं और खाद्य पदार्थों में) ने कीमतों का दबाव बढ़ा रखा है। रिपोर्ट में कहा गया है, वैश्विक मुद्रास्फीति (Global Inflation) भौगोलिक रूप से व्यापक है, यह अभी भी अमेरिका और यूरोप में उच्च स्तर पर बनी हुई है, यह एशिया के कई हिस्सों में कम है।
वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक के अपडेट के अनुसार, वैश्विक आर्थिक विकास 2022 में 3.1 फीसदी था जो 2023 यह गिरकर 2.9 फीसदी तक रहने का अनुमान है। हालांकि, 2024 में इसके 3.1 फीसदी रहने का अनुमान है। पूर्वानुमानित वृद्धि कम बनी हुई है, लेकिन पिछली भविष्यवाणियों के बाद से समग्र तस्वीर में थोड़ा सुधार हुआ है। 2023 के लिए मौजूदा अनुमान अक्तूबर में वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक में की गई भविष्यवाणी से 0.2 फीसदी अंक अधिक है।
आईएमएफ ने कुछ देशों और क्षेत्रों के लिए व्यक्तिगत आधार पर विकास अनुमान भी प्रदान किए हैं। अमेरिका में 2022 में 2.0 फीसदी की अनुमानित वृद्धि हुई थी। 2024 में इसके 1.0 फीसदी तक गिरने से पहले 2023 में इसके 1.4 फीसदी तक गिरने का अनुमान है। हालांकि, चीन की विकास दर 2022 में 3.0 फीसदी से बढ़कर 5.2 फीसदी होने की उम्मीद है।
हालांकि, 2023 में इसके घटकर 4.5 फीसदी रहने का अनुमान है। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि इस साल भारत की विकास दर 6.8 प्रतिशत से घटकर 6.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है। हालांकि, 2024 में इसके बढ़कर 6.8 प्रतिशत होने का अनुमान है।