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Budget 2021: निजीकरण के लिए बजट में नई नीति ला सकती है सरकार

Fri, 29 Jan 2021 02:32 AM IST
Jeet Kumar एजेंसी, नई दिल्ली।
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बजट 2021 - फोटो : अमर उजाला
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सरकार 2021-22 के आम बजट में निजीकरण के लिए नई नीति पेश कर सकती है। इसके तहत सरकार गैर-रणनीतिक क्षेत्र से संबंधित सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) में पूरी हिस्सेदारी बेचकर बाहर निकलेगी।

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सूत्रों ने बताया कि वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण आगामी बजट में नई निजीकरण नीति की रूपरेखा पेश कर सकती हैं। इसके तहत एक अप्रैल, 2021 से शुरू हो रहे नए वित्त वर्ष के लिए उन रणनीतिक क्षेत्रों के पीएसयू की पहचान की जाएगी, जिसे सरकार को अपने पास रखना है यानी उसे बने रहना है। 

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को नई सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम नीति को मंजूरी दी है, जो गैर-रणनीतिक एवं रणनीतिक क्षेत्रों को परिभाषित करेगी। राष्ट्रीय और लोक हित से जुड़े सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम रणनीति क्षेत्र के तहत आएंगे।
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सरकार ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत मई में घोषणा की थी कि रणनीतिक क्षेत्रों में अधिकतम चार सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां रहेंगी। इनमें अन्य सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों का निजीकरण किया जाएगा। नीति के तहत रणनीतिक क्षेत्रों की सूची को अधिसूचित किया जाएगा। इनमें कम-से-कम एक और अधिकतम चार सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां होंगी।

अन्य क्षेत्रों में केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (सीपीएसई) का निजीकरण उनकी व्यवहार्यता के आधार पर किया जाएगा। इससे पहले निवेश एवं सार्वजनिक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) की ओर से तैयार प्रस्ताव में 18 क्षेत्रों को रणनीतिक क्षेत्र के तौर पर चुना गया है। इसमें ऊर्जा, उर्वरक, दूरसंचार, रक्षा, बैंकिंग और बीमा आदि शामिल हैं। 



खर्च के लिए रकम जुटाने में मिलेगी मदद
सूत्रों ने बताया कि बजट में केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के निजीकरण पर ध्यान दिया जाएगा। इससे सरकार अपने बढ़े हुए खर्च के लिए रकम जुटा सकेगी। चालू वित्त वर्ष में सरकार ने सीपीएसई की अल्पांश हिस्सेदारी बेचकर और शेयर पुनर्खरीद के जरिए 17,957 करोड़ रुपये जुटाए हैं। 2020-21 के दौरान विनिवेश से 2.10 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य है।

देश में 249 परिचालन वाले केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम हैं, जिनका संयुक्त कारोबार 24 लाख करोड़ रुपये और नेटवर्थ 12 लाख करोड़ रुपये है। इनमें 54 सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम शेयर बाजारों में सूचीबद्ध हैं।

वेतनभोगी या मध्यम वर्ग को कर में राहत की उम्मीद नहीं
विशेषज्ञों का कहना है कि आम बजट में वेतनभोगियों या मध्यम वर्ग को राहत मिलने की उम्मीद नहीं है क्योंकि सरकार वर्तमान टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं करने जा रही है। हालांकि, आयकर कानून की धारा 80सी और 80डी के तहत वेतनभोगिया या मध्यम वर्ग को कुछ राहत जरूर मिल सकती है।

कर विशेषज्ञ डीके मिश्रा का कहना है कि सरकार ने महामारी से उबारने के लिए उद्योग को समय-समय पर पर्याप्त प्रोत्साहन पैकेज दिए हैं। ऐसे में वेतनभोगी और मध्यम वर्ग भी इस बजट में कर छूट मिलने की उम्मीद लगाए है। मेरा मानना है कि सरकार 80सी के तहत छूट का दायरा 1.5 लाख से बढ़ाकर 2.5 लाख से 3 लाख रुपये तक कर सकती है।

वहीं, डेलॉय इंडिया की कर विशेषज्ञ एवं साझेदार नीरू आहूजा कहती हैं कि वर्तमान टैक्स स्लैब के तहत पांच लाख रुपये तक की कमाई पर 5 फीसदी और इसके बाद 5-7 लाख रुपये की आय पर 20 फीसदी व्यक्तिगत कर देना पड़ता है, जो बहुत बड़ा अंतर है। सरकार को यह अंतर घटाने पर ध्यान देना चाहिए। 80सी के तहत भी छूट का दायरा बढ़ाने की जरूरत है।

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