एमएसपी को मात्र एक सुरक्षा कवच बताते हुए नेशनल रेनफेड एरिया अथॉरिटी (एनआरएए) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अशोक दलवाई ने कहा कि सरकार एक प्रतिस्पर्धी कृषि-बाजार को अस्तित्व में लाने के लिए कदम उठा रही है और लाभकारी मूल्य एमएसपी नहीं है।
अब मक्का का बढ़ाया जाएगा उत्पादन
किसानों की आय वर्ष 2022 तक दोगुनी करने के उद्देश्य के तहत केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने मक्के की फसल का उत्पादन और इसकी गुणवत्ता में कैसे सुधार हो, इसके लिए सीएसआईआर के भारतीय मक्का अनुसंधान संस्थान, लुधियाना को इसकी जिम्मेदारी सौंपी है।
पांचवे मक्का शिखर सम्मेलन 2018 का यहां उद्घाटन करते हुए राधा मोहन सिंह ने बताया कि इस समय देश में मक्का की जितनी खेती होती है, उसमें से महज 15 फीसदी जमीन ही सिंचित है। सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने की वजह से इसका उत्पादन कम होता है। इसलिए सरकार ने इसकी उत्पादकता बढ़ाने और मक्के की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए काम शुरू कर दिया है और लुधियाना के भारतीय मक्का अनुसंधान संस्थान को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
25 फीसदी लोगों तक ही सीमित
अधिकारियों का कहना है कि पौष्टिक एवं अन्य गुणों से भरपूर मक्का का उपयोग अभी भी देश की अधिकतर आबादी नहीं करती। अभी तक इसकी पहुंच महज 25 फीसदी लोगों तक ही हो पाई है। सरकार चाहती है कि कम कीमत पर अधिक से अधिक लोगों को पोषक आहार उपलब्ध कराने में मक्का भी बेहतर भूमिका हो सकती है। भारत में सबसे ज्यादा खेती धान एवं गेहूं की होती है और इसके बाद मक्का का ही स्थान आता है।
28 राज्यों में दिया जा रहा बढ़ावा
कृषि मंत्री का कहना है कि इस समय केंद्र सरकार ने 28 राज्यों के 265 जिलों में मक्के की खेती को बढ़ावा देने के लिए एक मिशन की शुरुआत की गई है। वर्ष 2015-16 से ही केंद्र और राज्य सरकारों के बीच 60 अनुपात 40 के फार्मूले पर इस मिशन को लागू किया जा रहा है।
नहीं मिल रहा एमएसपी
मक्का शिखर सम्मेलन के दौरान ही एक विशेषज्ञ ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर बताया कि सरकार को यह सब चीजें शिखर सम्मेलन के दौरान ही याद आता है। सरकार ने मक्का का एमएसपी 1425 रुपये घोषित कर रखा है लेकिन बिहार के गुलाब बाग मंडी में आज की तारीख में मक्का हाजिर 1250 रुपये प्रति क्विंटल पर उपलब्ध है।