बैंकिंग मामलों के जानकार अश्विनी राणा का कहना है कि ऐसी मुश्किल घड़ी में बैंकों ने उद्योगों को अतिरिक्त मदद देने के लिए उनकी क्रेडिट लिमिट को भी बढ़ा दिया है। मसलन, किसी इकाई को अगर पूर्व में 1 करोड़ रुपये का कर्ज मिलता था तो अब वह 10 से 20 फीसदी ज्यादा कर्ज ले सकेगा। लोन की समयावधि 36 महीने होगी जिस पर शुरुआती छह माह तक ईएमआई नहीं ली जाएगी।
48 घंटे में 50 लाख का कर्ज
सिडबी दवा और चिकित्सकीय उपकरणों की आपूर्ति करने वाले लघु और मध्यम उद्योगों को 50 लाख रुपये तक ऋण 48 घंटे में उपलब्ध कराएगा। सिडबी असिस्टेंट टू फैसिलिटेट इमरजेंसी (सेफ) योजना के तहत उद्योगों को 5% की ब्याज दर पर यह ऋण मिलेगा। इस कर्ज को पांच वर्ष में चुकाना होगा। योजना के तहत हैंड सैनिटाइजर, मास्क, दस्ताने, हेड गियर, बॉडी सूट, जूते के कवर, वेंटिलेटर, चश्में इत्यादि बनाने वाले लघु और मध्यम उद्योग ऋण पाने के योग्य होंगे।
- एसबीआई एक अरब 4 साल 11.2% से शुरू
- बैंक ऑफ इंडिया 5 करोड़ 7 साल 10.2% से शुरू
- एचडीएफसी बैंक 50 लाख 4 साल 15% से शुरू
- एक्सिस बैंक 50 लाख 3 साल 16% से शुरू
- आईसीआईसीआई बैंक 40 लाख 4 साल 16% से शुरू
- कोटक महिंद्रा बैंक 2 करोड़ 5 साल 13% से शुरू
सरकारी योजनाओं के तहत कर्ज
राशि अवधि ब्याज
- सिडबी स्माइल योजना 50 लाख 10 साल 9.45-12.70%
- प्रधानमंत्री मुद्रा योजना 10 लाख बैंक पर निर्भर बैंक पर निर्भर
- बैंक क्रेडिट फैसिलिटेशन 5 करोड़ 5-7 साल बैंक पर निर्भर
- 59 मिनट में एमएसएमई कर्ज 1 करोड़ बैंक पर निर्भर 8%
बढ़ सकता है एनपीए का खतरा
बैंकों को आर्थिक मदद के साथ इस बात की मॉनिटरिंग भी करनी होगी कि आपात कर्ज लेने वाले उद्योग इसका इस्तेमाल सही जगह करें। जिन उद्योगों पर पहले से ही भारी कर्ज है, उन्हें और पूंजी देने से बैंकों पर एनपीए का बोझ बढ़ने का जोखिम होगा। -अश्विनी राणा, सचिव, वॉइस ऑफ़ बैंकिंग