कटक में जन्मे, आईआईटी से की पढ़ाई
अजित जैन का जन्म ओडिशा के कटक में हुआ था। आईआईटी खड़गपुर से 1972 में पढ़ाई पूरी करने के बाद 1973 से 1976 तक आईबीएम में बतौर सेल्समैन काम किया। इसके बाद 1978 में हार्वर्ड बिजनेस स्कूल से एमबीए किया। फिर वे मैकिन्जी एंड कंपनी से जुड़ गए।
1980 में एक बार फिर वह भारत लौट आए लेकिन इस बार उनकी शादी हो गई। जैन को बफे की कंपनी बर्कशायर हैथवे से मिशेल गोल्डर्बग नामक शख्स ने बुलाया। पुरानी कंपनी मैकिन्जी में जैन के बॉस गोल्डबर्ग ही थे। गोल्डबर्ग ने मैकिन्जी को 1982 में ही छोड़ दिया था।
1986 में जुड़े थे बर्कशायर हैथवे से
बर्कशायर हैथवे में जैन ने 1986 में कदम रखा था। वो तब से लेकर के अब तक कंपनी के बीमा विभाग में कार्यरत हैं। निवेशकों के लिए लिखी अपनी सालाना चिट्ठी में इन्वेस्टमेंट गुरु वॉरेन बफे से कामयाबी का श्रेय पाने वालों में सबसे पहला नाम अजित जैन का लिया था। चिट्ठी में बफे ने लिखा कि जब अजित ने ऑफिस ज्वाइन किया था तो उन्हें बीमा सेक्टर का बिल्कुल अनुभव नहीं था। तब से अब तक अजित बर्कशायर के निवेशकों के लिए सैकड़ों करोड़ की वैल्यू बढ़ा चुके हैं।
कंपनी ने दिया इतना रिटर्न
वॉरेन बफे की कंपनी ने 1964 से अब तक निवेशकों को 2,472,627% रिटर्न दिया है। ये आंकड़ा बेंचमार्क के मुकाबले करीब 165 गुना अधिक है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक अगर 55 साल पहले किसी ने बर्कशायर हैथवे में 10,000 डॉलर का निवेश किया होगा, तो आज उनकी कीमत 17 करोड़ डॉलर से अधिक है।
हाल ही में खरीदे अमेजन के शेयर
बर्कशायर हैथवे में निवेश करने वाले कम से कम 7 लोग खरबपति बन गए। बफे आमतौर पर टेक्नालॉजी शेयरों को नजरअंदाज करते हैं, हालांकि उन्होंने गुरुवार को अमेजन के शेयर खरीदे। बफे ने स्वीकार किया कि वे प्रोडक्ट और बाजार को समझ नहीं सके और उन्होंने जेफ बेजोस को कम आंका था।