वोडाफोन आइडिया पर 17,100 करोड़ रुपये की देनदारी
वोडाफोन आइडिया को 31 मार्च 2019 को समाप्त हुए वित्त वर्ष में कुल 17,100 करोड़ रुपये की देनदारी थी। इसका उल्लेख कंपनी ने अपनी बैलेंस शीट में भी कर रखा है। कंपनी ने देनदारी चुकाने के लिए तब 4300 करोड़ रुपये का मद रखा था। कंपनी की सकल देनदारी कुल 1.22 लाख करोड़ रुपये थी, जिसमें से 90,700 करोड़ रुपये स्पेक्ट्रम देनदारी और 31 हजार करोड़ रुपये गैर स्पेक्ट्रम देनदारी है।
एयरटेल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि एजीआर का 90 दिनों के भीतर भुगतान करना कंपनियों के साथ ही बैंकों के लिए भी एक बड़ी समस्या बन सकता है। अगर बैंक गारंटी लोन में तब्दील होने के बाद एनपीए बनती है तो इससे बैंक ग्राहकों पर भी असर पड़ेगा।
कंपनियां सरकार से मांग कर रही हैं कि एजीआर का भुगतान करने के लिए 90 दिन की समय सीमा को बढ़ाकर के कम से 20 साल किया जाए। ऐसा न होने पर कंपनियों के लिए अपना कारोबार चालू रखना मुश्किल हो सकता है।
टेलीकॉम सेक्टर हो सकता है वित्तीय मोर्चे पर और बेहाल
कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग लिमिटेड के वाइस प्रेसीडेंट और हेड ऑफ रिसर्च डा. रवि सिंह ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से पहले से ही बेहाल चल रहे टेलीकॉम सेक्टर की हालत और खराब हो सकती है। अभी जितनी कंपनियां इस सेक्टर में कार्यरत हैं, उन पर चार लाख करोड़ रुपये का बकाया है। नए निर्णय से इन कंपनियों को 1.3 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त बकाया बढ़ जाएगा।
सरकार को टेलीकॉम सेक्टर को राहत देने के लिए कुछ ठोस कदम उठाने पड़ेंगे, नहीं तो इससे डिजिटल इंडिया के कदमों पर ब्रेक लग जाएगा। जिन 16 कंपनियों को एजीआर का भुगतान करना है, उनमें से ज्यादातर बंद हो गई हैं। इससे बाकी कंपनियों पर अतिरिक्त बोझ आ गया है, जिसको कम करने के लिए सरकार की तरफ से गठित पैनल को कार्य करना चाहिए। अगर ऐसा नहीं होता है तो फिर कंपनियों की वित्तीय मोर्चे पर हाल और बेहाल हो सकता है।