वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज के मालिक वेणुगोपाल धूत की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। आईसीआईसीआई बैंक में जारी विवाद के बाद अब दिल्ली पुलिस ने एक और मामले में चार्जशीट दाखिल कर दी है। इस मामले में धूत को 7 साल तक की सजा हो सकती है।
यह है मामला
धूत के खिलाफ दो साल पहले तिरुपति सेरामिक्स के मालिक संजय भंडारी ने मामला दर्ज कराया था। तब भंडारी ने धूत के खिलाफ 30 लाख शेयर बिना बताए बेचने का आरोप लगाया था। यह सभी शेयर पहले भी किसी व्यक्ति को बेचे गए थे। इस ट्रांजेक्शन के बारे में धूत ने कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स को भी जानकारी नहीं दी थी।
बैंकों ने कर रखा है दिवालिया कोर्ट में केस
कई बैंकों ने वीडियोकॉन के खिलाफ दिवालिया कोर्ट और नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में याचिका दायर कर रखी है। अभी तक एनसीएएलटी ने 57 हजार करोड़ की रिकवरी के मामलों को स्वीकार कर लिया है।
चंदा कोचर भी लपेटे में
विडियोकॉन ग्रुप के मालिक धूत ने दीपक कोचर के साथ मिलकर बराबर की पार्टनरशिप में दिसंबर 2008 में न्यूपावर नाम से एक कंपनी खोली थी। इसमें यह भी कहा गया था कि कोचर परिवार, चंदा कोचर के रिश्तेदार महेश आडवाणी और नीलम आडवाणी संदेहास्पद बिजनेस ट्रांजेक्शन की मदद से धूत परिवार की ओर से स्थापित कंपनी न्यूपावर के मालिक बन गए थे। गुप्ता का कहना था कि लोन के बदले कंपनी का मालिकाना हक कोचर परिवार को ट्रांसफर किया गया था।
20 बैंकों ने दिया था कर्ज
आईसीआईसीआई बैंक ने कहा है कि वीडियोकॉन को 20 बैंकों ने लोन दिया था। बैंक लोन देने वाले कंशोर्शियम का हिस्सा था, जिसमें उसका योगदान मात्र 10 फीसदी था। अन्य बैंकों ने जिन शर्तों पर वीडियोकॉन को लोन दिया था, उसी का पालन बैंक ने भी किया था।
बैंक ने कहा है कि उसका लोन देने का सिस्टम मजबूत है। यह इस तरह से बनाया गया है कि कोई एक शख्स किसी कंपनी को कर्ज देने के बारे में फैसला नहीं कर सकता। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि बैंक की सीईओ चंदा कोचर के पति दीपक कोचर को लोन पास कराने की एवज में एक कंपनी में हिस्सेदारी दी गई थी।