वेदांता लिमिटेड ने तेल के दाम में गिरावट का हवाला देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में अपील दायर कर कहा है कि वह बाड़मेर तेल ब्लॉक से सरकार को अतिरिक्त मुनाफा देने की स्थिति में नहीं है।
कंपनी ने कहा है कि कोरोना वायरस महामारी के कारण वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में भारी गिरावट आई है। ऐसे में बाड़मेर तेल ब्लॉक के परिचालन का उसका अनुबंध 2030 तक बढ़ाया जाए। इसके लिए कंपनी को 10 फीसदी अतिरिक्त मुनाफे के भुगतान के लिए न कहा जाए। कंपनी की अपील पर दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र से जवाब मांगा है।
दरअसल वेदांता की दलील है कि अगर उसे 10 फीसदी अतिरिक्त मुनाफा देना पड़ता है तो उसके लिए राजस्थान ब्लॉक से उत्पादन जारी रखने में कठिनाई आएगी। इससे उत्पादन घटेगा और देश की ऊर्जा सुरक्षा की स्थिति प्रभावित होगी।
वेदांता ने अपनी अपील में कहा कि इससे आयात पर निर्भरता बढ़ेगी, क्योंकि बाड़मेर ब्लॉक का घरेलू कच्चे तेल में 25 फीसदी का योगदान है। इस मामले में न्यायमूर्ति जयंत नाथ और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ ने केंद्र को नोटिस जारी कर छह मई तक जवाब देने को कहा है।
वेदांता और सरकार के बीच उत्पादन भागीदारी करार (पीएससी) को 14 मई को विस्तार दिया जाना है। बता दें कि पीठ ने इस मामले की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए की।
सुनवाई के दौरान पीठ ने केंद्र और कंपनी से आपसी सहयोग के जरिए करार और दूसरी औपचारिकताएं अदालत के तीन जुलाई, 2018 के अंतरिम आदेश के अनुरूप करने को कहा।
अंतरिम आदेश में कहा गया था कि पीएससी का 2020 से 2030 तक विस्तार नई नीति के तहत किया जाएगा, जिसमें सरकार के मुनाफे के हिस्से में 10 फीसदी बढ़ोतरी की व्यवस्था है। हालांकि, अब वेदांता तीन जुलाई, 2018 के आदेश में संशोधन की अपील कर रही है।