दिवालिया हो चुकी कंपनियों को सरकार कर से जुड़े मामलों में राहत दे ताकि उन पर अलग से और आर्थिक बोझ न पड़े। इसके साथ ही सुपर रिच पर लगने वाले टैक्स सरचार्ज को कम किया जाए। अमर उजाला से खास बातचीत में एनए शाह एसोसिएट्स के पार्टनर अशोक शाह ने उम्मीद जताई कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपने बजट में इस तरह की घोषणा करेंगी, जिसका लाभ इन कंपनियों को मिलेगा।
शाह ने कहा कि पिछली बार के बजट में सुपर रिच पर लगने वाले सरचार्ज की वजह से ऐसे लोगों पर व्यक्तिगत आयकर की दर 35.88 फीसदी से बढ़कर के 42.74 फीसदी हो गई है। ऐसे में टैक्स बढ़ने से संग्रह कम होने की उम्मीद है। इसलिए वित्त मंत्री से अपील है कि वो सरचार्ज को कम करे, ताकि संग्रह में इजाफा हो।
शाह ने कहा कि आयकर कानून में कई ऐेसे प्रावधान है, जिसके कारण आईटीआर और टैक्स ऑडिट रिपोर्ट पेश करने पर क्लेम नहीं मिलता है। इनमें कई तरह के खर्च शामिल हैं, जिनमें ईपीएफ जमा करने में देरी का डिस्कलोजर, क्लब फीस का डिस्कलोजर, कैपिटल एक्सपेंडिचर का डिस्कलोजर। इन पर ऑडिटर को किसी तरह का क्लेम नहीं मिलता है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के निर्देश के बाद भी आयकर के सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट द्वारा केवल रिपोर्टिंग के द्वारा एडजस्टमेंट देना होता है। इससे करदाताओं को समय व धन का काफी नुकसान होता है।
बैंकिंग और एनबीएफसी सेक्टर में सरकार को कई बड़े रिफॉर्म करने होंगे और इसके लिए बजट में घोषणा हो सकती है। सरकार को उन सारे सेक्टर से निकल कर के आना होगा, जहां से उसे किसी तरह का कोई लाभ नहीं हो रहा है। इसके लिए विनिवेश कार्यक्रम को आगे ले जाना होगा। वहीं विदेशी निवेश को बढ़ाने के लिए भी कई कदम उठाने होंगे।