अर्थव्यवस्था में छाई सुस्ती के बीच पेश होने वाले बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण कई बड़ी और अहम घोषणाएं कर सकती हैं। पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष और एसएमसी इंवेस्टमेंट एंड एडवायजर्स के सीएमडी डॉ. डी के अग्रवाल ने अमर उजाला.कॉम से विशेष बातचीत में उम्मीद जताई है कि आने वाला बजट सभी वर्गों को खुश करेगा। पेश हैं उनसे हुई बातचीत के मुख्य अंशः
अर्थव्यवस्था फिलहाल अपने सबसे खराब दौर से गुजर रही है। ऐसे में आपको क्या लगता है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट में कुछ बड़े एलान करेंगी?
देखिए पिछले एक साल से अर्थव्यवस्था काफी मुश्किलों के दौर से गुजर रही है। महंगाई दर 7.35 फीसदी और विकास दर का अनुमान पांच फीसदी लगाया गया है। इस दौरान शेयर बाजार भी अपने अभी तक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। सरकार ने जुलाई से लेकर के अभी तक अर्थव्यवस्था में जान फूंकने के लिए कई बड़े कदम भी उठाए हैं। ऐसे में लगता है कि वित्त मंत्री आने वाले बजट में सुस्ती दूर करने और विकास को रफ्तार देने के लिए कई बड़े एलान कर सकती है। इस समय विश्व के कई देश सुस्ती के दौर से गुजर रहे हैं, जिसका असर भारत में भी देखने को मिल रहा है। वैश्विक मांग कम होने से औद्योगिक उत्पादन की रफ्तार भी धीमी हो गई है। ऐसे में लगता है कि बजट 2020-21 एक नई दिशा देने वाला होगा।
सरकार ने पिछले सात महीने में काफी कुछ एलान अलग-अलग सेक्टर में किए हैं। लेकिन अभी कोई फर्क नहीं दिखा है, क्या निवेश के मौके सभी सेक्टर में बढ़ेंगे?
हां ये सही है कि सरकार ने पिछले कुछ महीनों में अलग-अलग सेक्टर के लिए एलान किए हैं। सरकार के साथ ही पूरे उद्योग जगत को आशा है कि इन घोषणाओं का असर आने वाले महीनों में दिखेगा। चालू खाता घाटा और राजकोषीय घाटे को कम करने के साथ ही विकास देखने को मिलेगा। सरकार को कृषि क्षेत्र में भी निवेश के अवसर बढ़ाने चाहिए। कृषि क्षेत्र में भंडारण क्षमता को बढ़ान के साथ ही शिक्षा, कौशल विकास, स्वास्थ्य और सुरक्षा जैसे सेक्टर के लिए भी सरकार को घोषणाएं करनी चाहिए। ऐसी उम्मीद हमें वित्त मंत्री से इस बार के बजट भाषण से है।
एमएसएमई सेक्टर इस वक्त अपने सबसे मुश्किल दौर से गुजर रहा है। उद्योग संगठन के नाते क्या वित्त मंत्री से इस सेक्टर के लिए आशा रखते हैं?
सूक्ष्म लघु और मध्यम एंटरप्राइजेज (एमएसएमई) सेक्टर भारतीय अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा और डायनेमिक सेक्टर है। यह सेक्टर पिछले कई सालों से लाखों लोगों को रोजगार मुहैया करा रहा है। हालांकि सुस्ती से इस सेक्टर में सबसे ज्यादा असर देखने को मिला है। ऐसे में हमारी वित्त मंत्री से मांग है कि एक 25 हजार करोड़ रुपये का फंड इस सेक्टर के लिए बनाया जाए ताकि इनके विकास होता रहे।
इसके साथ ही एमएसएमई को शेयर बाजार में लिस्ट होने की सुविधा मिले। जो लोग इन कंपनियों के आईपीओ में निवेश करें, उनको आयकर में 50 फीसदी की छूट मिले, जो अधिकतम 2.50 लाख रुपये हो। इसके साथ ही सरकार बड़ी कंपनियों के सीएसआर फंड की 25 फीसदी राशि को एमएसएमई के आईपीओ में निवेश करने की इजाजत मिले। एमएसएमई को कर छूट का लाभ मिले जो पार्टनरशिप या फिर प्रोपराइटरशिप में कार्य कर रही हों।
एलटीसीजी, डीडीटी और अन्य टैक्स हटाने की शेयर बाजार लंबे समय से मांग कर रहा है। क्या आपको लगता है कि वित्त मंत्री ऐसा करेंगी?
लॉन्ग टर्म कैपिटल गेंस टैक्स, डीविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स सहित शेयर बाजार में लगने वाले अन्य टैक्स को कम करने के लिए हमने वित्त मंत्री से मांग की है। हमारा मानना है कि डीडटी को 10 से 15 फीसदी कर दिया जाए और एलटीसीजी को भी तर्कसंगत किया जाए। टैक्स लगाने के लिए एक से तीन साल का समय किया जाए, ताकि निवेशकों को फायदा हो। इसके साथ ही 10 लाख रुपये से ज्यादा लाभांश पर लगने वाले 10 फीसदी अतिरिक्त कर को हटाया जाए।
आयकर के स्लैब में क्या परिवर्तन हो सकता है? सरकार को पीएचडी ने क्या सलाह दी है?
PHDCCI ने वित्त मंत्रालय को आयकर के स्लैब में बदलाव करने की सलाह दी है। टास्क फोर्स के मुताबिक 10 लाख रुपये की सालाना आय पर 10 फीसदी, 10 लाख रुपये से 20 लाख रुपये तक की सालाना आय पर 20 फीसदी और 20 लाख से दो करोड़ रुपये तक की आय पर 30 फीसदी और इससे ज्यादा की आय पर 35 फीसदी की टैक्स स्लैब हो। इससे लोगों की आय में इजाफा हुआ है, जिससे वो काफी बचत कर लेंगे।
इसके साथ ही रियल एस्टेट सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए रेंटल हाउसिंग पॉलिसी को लाना चाहिए। जो डेवलपर्स ऐसा करें, उनको 10 साल का टैक्स हॉलीडे मिले। इससे इस सेक्टर में निवेश बढ़ेगा और एक प्रमुख सेक्टर को बूस्ट मिलेगा।