एक टायर कंपनी के मिड लेवल मैनेजमेंट में शामिल एक अधिकारी ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर बताया कि कच्चे तेल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी की वजह से अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कार्बन ब्लैक काफी महंगा हो गया है।
इसके साथ ही नायलॉन टायर फैब्रिक, रबर केमिकल्स और स्टील बीड वायर्स की कमी का भी सामना करना पड़ रहा है। उल्लेखनीय है कि टायर बनाने में इन कच्चे माल की 25-30 फीसदी की हिस्सेदारी होती है।
तुरंत राहत के आसार नहीं
टायर उद्योग को कच्चे माल की कीमतों में फिलहाल राहत मिलने के आसार भी नहीं हैं। दरअसल, सरकार ने कार्बन ब्लैक के आयात पर पिछले दिनों एंटी डंपिंग ड्यूटी थोप दी थी। इससे मांग के अनुरूप आपूर्ति नहीं हो रही है और कार्बन ब्लैक की कीमत 50 फीसदी तक महंगे हो गए हैं।
टायर कंपनियों ने कार्बन ब्लैक की कमी का मामला सरकार के सामने भी उठाया गया है, लेकिन इसमें फिलहाल राहत के आसार नहीं हैं। अधिकारियों का कहना है कि एंटी डंपिंग ड्यूटी हटने में भी छह महीने का समय लग सकता है।
सीसीआई से टायर कंपनियों की शिकायत
ऑल इंडिया टायर डीलर्स फेडरेशन के संयोजक एस पी सिंह का कहना है कि कच्चा तेल महंगा होने के नाम पर टायर की कीमतें बढ़ाई जा रही हैं, लेकिन अभी भी कच्चा तेल 70-75 डॉलर प्रति बैरल के आसपास ही चल रहा है।
टायर की जितनी कीमतें अभी हैं, उतनी तो वर्ष 2014 में भी नहीं हुई थी, जबकच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर से ऊपर थी। इसलिए उन्होंने टायर कंपनियों की शिकायत भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) तथा सरकार से भी किया है।