ब्रिटेन की दिग्गज ट्रैवल कंपनी थॉमस कुक ने रविवार को दिवालिया होने की घोषणा कर दी। 178 साल पुराने थॉमस कुक पर करीब 15 हजार करोड़ रुपए का कर्ज है। संचालन जारी रखने के लिए 1766 करोड़ रुपए की तत्काल जरूरत थी।
कंपनी के बंद होने से 22,000 लोगों की नौकरियों पर संकट मंडरा रहा है, जिसमें से 9,000 कर्मचारी यूके के हैं।
कंपनी के बंद होने से ना सिर्फ कर्मचारी बल्कि ग्राहक, सप्लायर और कंपनी के पार्टनर भी प्रभावित होंगे। इसलिए थॉमस कुक के चीफ एक्जिक्यूटिव पीटर फैंकहॉजर ने ग्राहकों, सप्लायर्स, कर्मचारी और पार्टनर्स से माफी मांगी।
मामले में यूके की नागरिक उड्डयन प्राधिकरण (CAA) ने कहा है कि 23 सितंबर से लेकर छह अक्तूबर तक रेगुलेटर व सरकार 150,000 से अधिक ब्रिटिश ग्राहकों को घर वापस लाने के लिए मिलकर काम करेंगे। सीएए ने ट्वीट कर बताया कि सभी बुकिंग्स रद्द कर दी गई हैं।
दुनिया की सबसे पुरानी ट्रैवल कंपनी लंबे समय से फंड की कमी से जूझ रही थी और बैंकों की एक समिति ने अतिरिक्त फंड की उसकी मांग पर फैसले रोक दिया था।
पिछले महीने अगस्त में थॉमस कुक ने रिकैपिटलाइजेशन से जुड़ी योजना को लेकर चीन की शेयरहोल्डर फोसुन के साथ एक सौदे की प्रमुख शर्तों को पर सहमति जताई थी। यह सौता 1.1 अरब डॉलर का था।
इतना ही नहीं, रॉयल बैंक ऑफ स्कॉटलैंड (आरबीएस) ने भी कंपनी को झटका दिया था। बैंक के एक प्रवक्ता ने कहा था कि कंपनी के 20 करोड़ पाउंड की अतिरिक्त फंड की मांग को चिह्नित नहीं किया गया। बता दें कि आरबीएस पिछले कई वर्षों से कंपनी को मदद उपलब्ध कराता रहा है।
भारत में एयरलाइंस या ट्रैवल कंपनियों के अचानक बंद होने पर पर्यटकों को वापस लेने पर कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है। संकटकाल में सरकार द्वारा खाड़ी देशों से कई बार यात्रियों को मानवता के आधार पर वापस लाया गया है। ब्रिटेन में डेढ़ लाख सैलानियों ने सरकार से बुल्गारिया, क्यूबा, तुर्की और अमेरिका से वापस आने की व्यवस्था करने की गुहार लगाई है।