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AGR मामला: SC ने लगाई फटकार, कंपनियों के एमडी को दी जेल भेजने की चेतावनी

Wed, 18 Mar 2020 11:48 AM IST
‌डिंपल अलवधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

उच्च न्यायालय ने फटकार लगाते हुए कहा है कि समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) बकाए को लेकर कंपनियां खुद आकलन न करें। इसे अवमानना माना जा सकता है। साथ ही, कोर्ट ने सभी टेलीकॉम कंपनियों के एमडी को जेल भेजने की चेतावनी भी दी है।
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सुप्रीम कोर्ट
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विस्तार
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उच्चतम न्यायालय ने कहा कि वह दूरसंचार कंपनियों के एमडी के खिलाफ अवमानना का मामला दर्ज करेगा, अगर उन्होंने एजीआर बकाए को लेकर अदालत के बारे में फर्जी खबर प्रसारित कीं। सुप्रीम कोर्ट ने दो टूक कहा कि बकाया राशि का पुनर्मूल्यांकन नहीं होगा। कंपनियों ने एजीआर बकाया का स्व-मूल्यांकन करने के नाम पर गंभीर धोखा किया है। जस्टिस अरुण मिश्रा ने कहा कि टेलीकॉम कंपनियों को कोर्ट के आदेश के मुताबिक भुगतान करना ही होगा। एजीआर बकाया पर हमारा फैसला अंतिम है, इसका पूरी तरह से पालन किया जाए। 

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दो सप्ताह बाद होगी अगली सुनवाई
साथ ही न्यायालय ने यह भी कहा कि दूरसंचार मामले में सुनवाई के दौरान एजीआर बकाया पर समाचार पत्रों के लेख अदालत को प्रभावित नहीं करेंगे। साथ ही कोर्ट ने केन्द्र की उस याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया, जिसमें उसने एजीआर बकाया अदा करने के लिए दूरसंचार कंपनियों को 20 साल का समय देने का अनुरोध किया था। मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।

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वोडा आइडिया के शेयर में 30 फीसदी गिरावट
इसके बाद वोडाफोन आइडिया के शेयर में गिरावट देखी गई। दोपहर 12.28 बजे इसमें 1.50 अंक यानी 30.93 फीसदी की गिरावट आई और 3.35 के स्तर पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में यह 5.30 पर खुला था और पिछले कारोबारी दिन 4.85 के स्तर पर बंद हुआ था। 16 मार्च को वोडाफोन आइडिया ने एजीआर के बकाए को लेकर दूरसंचार विभाग को 3,354 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान किया था। कंपनी ने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज को बताया था कि उसने स्वआकलन के हिसाब से अब एजीआर बकाए की मूल राशि का पूरा भुगतान कर दिया है। इस भुगतान के साथ ही कंपनी ने अभी तक सरकार को एजीआर बकाए को लेकर 6,854 करोड़ रुपये दिए हैं।

उच्चतम न्यायालय ने कंपनियों से 1.47 लाख करोड़ रुपये का सांविधिक बकाया 17 मार्च तक जमा करने को कहा था। इतनी बड़ी राशि के बकाए के भुगतान का कंपनियों की वित्तीय स्थिति पर फर्क पड़ सकता है। अकेले वोडाफोन-आइडिया पर, दूरसंचार विभाग के अनुमान के अनुसार 53,000 करोड़ रुपये का बकाया है। यह कंपनियों के उनके अपने आकलन से बहुत अधिक है।
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क्या है एजीआर ?
दूरसंचार कंपनियों को एजीआर का तीन फीसदी स्पेक्ट्रम फीस और आठ फीसदी लाइसेंस फीस के तौर पर सरकार को देना होता है। कंपनियां एजीआर की गणना दूरसंचार ट्रिब्यूनल के 2015 के फैसले के आधार पर करती थीं। ट्रिब्यूनल ने उस वक्त कहा था कि किराये, स्थायी संपत्ति की बिक्री से लाभ, डिविडेंड और ब्याज जैसे गैर प्रमुख स्रोतों से हासिल राजस्व को छोड़कर बाकी प्राप्तियां एजीआर में शामिल होंगी। जबकि दूरसंचार विभाग किराये, स्थायी संपत्ति की बिक्री से लाभ और कबाड़ की बिक्री से प्राप्त रकम को भी एजीआर में मानता है। इसी आधार पर वह कंपनियों से बकाया शुल्क की मांग कर रहा है। 

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