उच्चतम न्यायालय ने अपीलीय न्यायाधिकरण एनसीएलएटी के आदेश के खिलाफ टाटा संस प्राइवेट लिमिटेड और साइरस इनवेस्टमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड दोनों की याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने अपने आदेश में साइरस मिस्त्री को 100 अरब डॉलर से अधिक मूल्य के समूह के कार्यकारी चेयरमैन पद पर बहाल करने का आदेश दिया था।
शापूरजी पालोनजी समूह ने किया दावा
मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे, न्यायाधीश एएस बोपन्ना और न्यायाधीश वी रामासुब्रमणियम की पीठ ने दोनों पक्षों से विषय वर्गीकरण ब्योरा के साथ लिखित में निवेदन देने को कहा। वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए हुई सुनवाई के दौरान शापूरजी पालोनजी (एसपी) समूह ने दावा किया कि अक्तूबर 2016 में टाटा संस के चेयरमैन पद से साइरस मिस्त्री को हटाए जाने में कंपनी कामकाज के नियमों और गठन उद्देश्य तथा कंपनी कानून के प्रावधानों का उल्लंघन किया गया।
NCLAT के आदेश पर लगाई थी रोक
टाटा ने आरोपों से इनकार किया और दावा किया कि मिस्त्री को हटाए जाने के मामले में कुछ भी गड़बड़ी नहीं हुई और जो भी कदम उठाए गए, वह उसके अधिकारों के अंतर्गत आते थे। शीर्ष अदालत ने 10 जनवरी को टाटा समूह को राहत देते हुए एनसीएलएटी के पिछले साल 18 दिसंबर के आदेश पर रोक लगा दी थी। आदेश में मिस्त्री को टाटा समूह का कार्यकारी चेयरमैन बहाल किए जाने को कहा गया था।
2012 में मिस्त्री ने लिया था रतन टाटा का स्थान
मिस्त्री ने 2012 में टाटा संस के चेयरमैन के रूप में रतन टाटा का स्थान लिया था। लेकिन चार साल बाद 24 अक्तूबर 2016 को उन्हें बर्खास्त कर दिया गया। न्यायालय ने अपीलीय न्यायाधिकरण के आदेश के चुनौती देने वाली साइरस मिस्त्री की अपील (क्रॉस अपील) पर 29 मई को टाटा संस और अन्य को नोटिस जारी किया था। मिस्त्री की अपील के अनुसार वह कंपनी में अपने परिवार की हिस्सेदारी के बराबर प्रतिनिधित्व चाहते हैं। उनके परिवार की टाटा समूह में 18.37 फीसदी हिस्सेदारी है।