सुप्रीम कोर्ट से इजाजत मिलने के बाद सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास प्रोजेक्ट का रास्ता साफ हो गया है। बुनियादी ढांचा क्षेत्र की कंपनी शापूरजी पालोनजी एंड कंपनी लिमिटेड राजपथ पुनर्विकास परियोजना के लिए सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी के रूप में उभरी है। केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) के बोली दस्तावेज के अनुसार, कंपनी ने 477.08 करोड़ रुपये की बोली लगाई है, जो अनुमानित लागत से 4.99 फीसदी कम है।
टाटा प्रोजेक्ट्स ने लगाई दूसरी सबसे कम बोली
टाटा प्रोजेक्ट्स ने परियोजना के लिए दूसरी सबसे कम बोली 488.78 करोड़ रुपये की लगाई। यह सरकार की 13,500 करोड़ रुपये की लागत वाली सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास योजना का हिस्सा है। एक अधिकारी ने बताया कि ऐतिहासिक राजपथ का पुनर्विकास कार्य 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस परेड के तुरंत बाद शुरू होगा।
सितंबर में टाटा ने हासिल की निविदा बोली में जीत
कार्य 2022 के गणतंत्र दिवस परेड से पहले पूरा हो सकता है। शापूरजी पालोंजी एंड कंपनी लिमिटेड और टाटा प्रोजेक्ट्स के अलावा एनसीसी लिमिटेड और आईटीडी सीमेंटेशन इंडिया लिमिटेड वित्तीय बोलियों के लिए पात्र पाई गई थी। आईटीडी सीमेंटेशन इंडिया लिमिटेड ने 490.59 करोड़ रुपये जबकि एनसीसी लिमिटेड ने 601.46 करोड़ रुपये की बोली लगाई थी। टाटा प्रोजेक्ट्स ने पिछले साल सितंबर में नए संसद भवन के निर्माण की निविदा बोली में जीत हासिल की।
प्रोजेक्ट की घोषणा से हरी झंडी मिलने तक
- सितंबर 2019: सेंट्रल विस्टा परियोजना की घोषणा की गई।
- 11 फरवरी 2020: दिल्ली हाईकोर्ट ने डीडीए को मास्टर प्लान में बदलाव को लेकर किसी भी अधिसूचना जारी करने से पहले कोर्ट जाने को कहा।
- 28 फरवरी 2020: डीडीए की अपील पर हाईकोर्ट की खंडपीठ ने एकल पीठ के आदेश पर रोक लगाई।
- 17 जुलाई 2020: पर्यावरण मंजूरी, लैंड यूज संबंधी कई मुद्दों पर दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई शुरू की।
- 5 नवंबर 2020: सुप्रीम कोर्ट ने परियोजना को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर फैसला सुरक्षित रखा।
- 7 दिसंबर 2020: शीर्ष अदालत ने सरकार को शिलान्यास कार्यक्रम करने की मंजूरी दी, हालांकि निर्माण शुरू करने से रोक दिया।
- 10 दिसंबर 2020: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परियोजना का शिलान्यास किया।
- 5 जनवरी 2021: सुप्रीम कोर्ट ने महत्वाकांक्षी परियोजना के निर्माण का रास्ता साफ किया।