टाटा-मिस्त्री विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को टाटा-साइरस मिस्त्री मामले में अपीली न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) के कंपनी पंजीयक की याचिका रद्द करने के आदेश पर रोक लगा दी है। एनसीएलएटी ने कंपनी पंजीयक के उसके आदेश में संशोधन के अनुरोध से जुड़ी याचिका को खारिज कर दिया था।
इस क्रम में कंपनी मामलों के मंत्रालय के अधीन आने वाले आरओसी ने न्यायाधिकरण में याचिका दायर करके टाटा संस को निजी कंपनी में तब्दील किए जाने के मामले में ‘अवैध’ और ‘आरओसी की मदद से’ शब्द हटाए जाने का आग्रह किया था। हालांकि एनसीएलएटी ने फैसले में संशोधन के अनुरोध को खारिज करते हुए कहा था कि फैसले में आरओसी के बारे में कुछ भी नहीं कहा गया है।
साइरस मिस्त्री टाटा संस के छठे चेयरमैन थे और उन्हें इस पद से अक्तूबर 2016 में हटा दिया गया था। रतन टाटा के बाद उन्होंने 2012 में चेयरमैन का पद संभाला था। समूह के 150 साल के इतिहास में मिस्त्री चेयरमैन बनने वाले टाटा परिवार से बाहर के दूसरे व्यक्ति थे।
बता दें सितंबर 2017 में टाटा संस को पब्लिक से प्राइवेट कंपनी बनाने के लिए शेयरधारकों ने मंजूरी दी थी। उसके बाद रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (आरओसी) ने टाटा संस को निजी कंपनी के तौर पर दर्ज किया था। सायरस मिस्त्री परिवार इसके खिलाफ था क्योंकि निजी कंपनी होने से वे अपने शेयर बाहरी लोगों को नहीं बेच सकते, बल्कि टाटा को ही बेचने पड़ेंगे। जबकि, पब्लिक लिमिटेड कंपनी के शेयरधारक किसी को भी अपनी हिस्सेदारी बेच सकते हैं।