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सुप्रीम कोर्ट से सहारा प्रमुख सुब्रत रॉय को राहत, बढ़ी पेरोल

Tue, 28 Feb 2017 09:18 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
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सहारा प्रमुख सुब्रत राय - फोटो : getty images
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सहारा इंडिया परिवार के मुखिया सुब्रत रॉय सहारा को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल गई है। कोर्ट ने सुब्रत रॉय की पेरोल को 17 अप्रैल तक बढ़ा दिया है। कोर्ट ने सहारा को आदेश दिया है कि अगर वह बाहर रहना चाहते हैं तो सात अप्रैल तक 5092.6 करोड़ रुपये सहारा-सेबी खाते में जमा कराएं। इससे पूर्व सहारा प्रमुख सुब्रत रॉय को सुप्रीम कोर्ट ने राहत देते हुए 27 फरवरी तक उनकी पेरोल आगे बढ़ाया था।
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कोर्ट ने सहारा को वादरहित संपत्तियों को बेचकर 13 अप्रैल तक सेबी-सहारा खाते में 5092 करोड़ रुपये जमा करने के लिए कहा है। इन संपत्तियों में लखनऊ स्थित सहारा अस्पताल और सहारा सिटी होम भी है जिन्हें बेचकर निवेशकों को राशि लौटाई जाएगी।

न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि सुब्रत राय और समूह के दो अन्य निदेशकों के पैरोल बढ़ाने पर तभी विचार किया जाएगा जब 13 अप्रैल तक मुनासिब रकम सेबी-सहारा खाते में जमा हो। पीठ ने सहारा प्रमुख की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल की उस अपील को ठुकरा दिया कि संपत्तियों को बेचने और खाते में जमा करने के लिए कम से कम छह महीने का वक्त दिया जाए।
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पीठ ने सहारा समूह की ओर से सौंपी गई 15 संपत्तियों की सूची में से 13 संपत्तियों को बेचने की अनुमति देते हुए 13 अप्रैल तक रकम सेबी-सहारा के खाते में जमा करने के लिए कहा है। पीठ ने कहा, ‘हम अवमानना करने वाले (सुब्रत राय) को संपत्तियों की बिक्री करने की इजाजत देते हैं चाहे वह इन 13 संपत्तियों को बेच दें या अन्य संपत्तियों को, हम छह महीने की इजाजत नहीं दे सकते।’ हालांकि पीठ ने सहारा को फोर्स-वन फामूर्ला रेस टीम में अपनी हिस्सेदारी बेचने की इजाजत देने से इनकार कर दिया।


सहारा समूह ने पीठ को यह भी बताया कि गाजियाबाद विकास प्राधिकरण ने उसकी 91.69 एकड़ जमीन का अधिग्रहण कर रखा है और मुआवजे की 1120.7 करोड़ रुपये की रकम अधर में है। इस पर पीठ ने प्राधिकरण को नोटिस जारी किया है और सुनवाई की अगली तारीख 17 अप्रैल को प्राधिकरण के सक्षम अधिकारी को पेश होने के लिए कहा है। पीठ में न्यायमूर्ति रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति एके सिकरी भी शामिल हैं। पीठ ने कहा कि 7 अप्रैल तक यदि पर्याप्त राशि जमा करा दी जाती है तो अदालत आगे समय बढ़ाने पर भी विचार कर सकती है। 


वहीं एक कंपनी ने पीठ के समक्ष कहा कि वह न्यूयॉर्क स्थित प्लाजा होटल में सहारा समूह की हिस्सेदारी खरीदने के लिए इच्छुक है। इस पर पीठ ने कंपनी से कहा कि पहले वह 10 अप्रैल से पहले 750 करोड़ रुपये जमा कराएं।

वहीं सुनवाई के दौरान सेबी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अरविंद दत्तार ने सहारा की संपत्तियों की बिक्री की ई-नीलामी करने का सुझाव दिया। दत्तार ने बताया कि सेबी ने सूची में दर्ज कुछ संपत्तियों की नीलामी का प्रयास भी किया था लेकिन सफल नहीं हो पाया।

इस पर सिब्बल ने सुझाव दिया कि अदालत उनकी कुछ संपत्तियों को बतौर सिक्योरिटी रख सकती है और सहारा समूह अदालत को यह अधिकार दे सकता है कि यदि 22 महीने में उक्त राशि जमा नहीं होती है तो इन संपत्तियों को बेच दिया जाए। 


  Supreme Court bench extends parole of Subrata Roy till April 17. pic.twitter.com/huvTqXz4Kh — ANI (@ANI_news) February 28, 2017
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सहारा ने मांगा था 2019 तक का समय

सुब्रत रॉय सहारा - फोटो : pti
गौरतलब है कि सहारा प्रमुख 5 मई 2016 से पेरोल पर जेल से बाहर हैं। 12 जनवरी को सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने सुब्रत राय से सेबी को 600 करोड़ रुपये जमा करने को कहा था। साथ ही समूह की पुणे स्थित ऐंबी वैली को जब्त कर लिया गया है।

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायाधीश एके सीकरी की पीठ ने 20 फरवरी तक सहारा से उन सभी संपत्तियों की सूची मांगी थी जो विवादित नहीं है। जिससे इन संपत्तियों की नीलामी के जरिए सहारा से उसका बकाया वसूला जा सके। 

कोर्ट के मुताबिक सहारा को उनके बकाया 14,779 करोड़ रुपये चुकाने को बाध्य करने के लिए यह निर्णय जरुरी था। ऐंबी वैली सहारा समूह के द्वारा महाराष्ट्र में बसाई गई एक टाउनशिप है। जिसकी कीमत लगभग 39 हजार करोड़ रुपये है।

आपको बता दें कि सहारा ने इससे पहले 11 हजार करोड़ रुपये सेबी को चुका दिए थे।

बाकी की बची रकम को चुकाने के लिए सहारा समूह ने कोर्ट से जुलाई 2019 तक का वक्त मांगा था। लेकिन कोर्ट ने समूह द्वारा मांगे गए समय को ज्यादा बताते हुए समूह की इस मांग को खारिज कर दिया। वहीं कोर्ट जल्द से जल्द नीलामी के जरिए बकाया राशि वसूल करना चाहता है।
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