भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया समेत दूरसंचार कंपनियों ने 1.47 लाख करोड़ रुपये के वैधानिक बकाये के भुगतान के लिए नए सिरे से योजना बनाने की मांग को लेकर उच्चतम न्यायालय में नई याचिका डाली। न्यायालय ने कहा है कि वैधानिक बकाये को लेकर दूरसंचार कंपनियों की याचिका पर सुनवाई अगले हफ्ते की जाएगी।
भारती एयरटेल 21,682.13
वोडाफोन-आइडिया 19,823.71
रिलायंस कम्युनिकेशंस 16,456.47
बीएसएनएल 2,098.72
एमटीएनएल 2,537.48
(नोट : राशि करोड़ रुपये में, इसमें जुर्माना और ब्याज शामिल नहीं है।)
दूरसंचार कंपनियों को एजीआर का तीन फीसदी स्पेक्ट्रम फीस और आठ फीसदी लाइसेंस फीस के तौर पर सरकार को देना होता है। कंपनियां एजीआर की गणना दूरसंचार ट्रिब्यूनल के 2015 के फैसले के आधार पर करती थीं। ट्रिब्यूनल ने उस वक्त कहा था कि किराये, स्थायी संपत्ति की बिक्री से लाभ, डिविडेंड और ब्याज जैसे गैर प्रमुख स्रोतों से हासिल राजस्व को छोड़कर बाकी प्राप्तियां एजीआर में शामिल होंगी। जबकि दूरसंचार विभाग किराये, स्थायी संपत्ति की बिक्री से लाभ और कबाड़ की बिक्री से प्राप्त रकम को भी एजीआर में मानता है। इसी आधार पर वह कंपनियों से बकाया शुल्क की मांग कर रहा है।