बाजार नियामक सेबी ने बाबा रामदेव की कंपनी रुचि सोया के शेयरों में हेराफेरी के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। सेबी ने सात कंपनियों को निर्देश दिया कि वे रुचि सोया इंडस्ट्रीज लिमिटेड के शेयरों की कीमतों में हेराफेरी से हासिल 5.75 करोड़ रुपये के गैरकानूनी लाभ को वापस करें। नियामक ने अपने आदेश में इन कंपनियों को 28 सितंबर 2012 से वास्तविक भुगतान की तिथि तक यह राशि 12 फीसदी ब्याज के साथ जमा करने को कहा है।
पिछले साल ये कंपनी दिवालिया हो गई थी और तब दिवालिया बिक्री में पतंजलि ने रुचि सोया को खरीद लिया था। रुचि सोया भारत में मौजूद सबसे बड़ी खाद्य तेल कंपनियों में से एक है। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय कंपनी विधि प्राधिकरण (एनसीएलटी) ने कर्जदाता स्टैन्डर्ड चार्टर्ड बैंक तथा डीबीएस बैंक के आवेदन पर रुचि सोया के मामले को ऋण शोधन कार्यवाही के लिए भेजा था। ऋण शोधन कार्यवाही के लिये शैलेन्द्र अजमेरा को समाधान पेशेवर नियुक्त किया गया था। रुचि सोया इंडस्ट्रीज के ऊपर करीब 9300 करोड़ रुपये का बकाया था। कंपनी के निदेशक मंडल की 19 अगस्त 2020 को हुई बैठक में राम भरत को उसी दिन से 17 दिसंबर 2022 तक के लिए प्रबंध निदेशक नियुक्त किया था।
योग गुरू बाबा रामदेव की अगुवाई वाली पतंजलि समूह ने कर्जदाताओं ने कर्ज में डूबी खाद्य तेल कंपनी रुचि सोया के अधिग्रहण के लिए पतंजलि आयुर्वेद की 4,325 करोड़ रुपये की बोली को मंजूरी दी थी।