एनालिटिक्स की कवायद जुलाई और मार्च के बीच (जीएसटी लागू होने के बाद पहले नौ महीने) के आंकड़े के आधार पर की गई थी। जीएसटी परिषद ने मार्च में अधिकारियों को आदेश दिया था कि वे और अधिक विश्लेषण कर कर चोरी का सुराग खोजें और जरूरी कार्रवाई शुरू करें।
इनसे भी हो सकती है विसंगतियां
ईवाई के पार्टनर अभिषेक जैन ने कहा कि ये विसंगतियां जीएसटीआर-2ए में दिखाए गए उन क्रेडिटों की वजह से भी हो सकते हैं, जो योग्य नहीं हैं जैसे रेंट ए कैब, फूड एंड बेवरेज, छूट वाली आपूर्ति के लिए इनपुट। ये नोटिस हालांकि कारोबारियों के लिए सकारात्मक भी हो सकते हैं जिन्होंने एयरलाइन क्रेडिट, होटल क्रेडिट आदि क्रेडिट का भूल से दावा नहीं किया है।
कालाबाजारी हो सकती है एक वजह
एएमआरजी एंड एसोसिएट्स के पार्टनर रजत मोहन ने कहा कि कर क्रेडिट के कम दावे के पीछे कई कारण हो सकते हैं। कुछ कारण वाजिब हो सकते हैं। अन्य कारण हो सकते हैं खरीदारियों की रिपोर्टिंग नहीं करना और बाद में उसकी आपूर्ति कालाबाजारी में करना। इससे बड़े पैमाने पर कर की चोरी हो सकती है।
इन उद्योगों में कर चोरी करना आसान
मोबाइल फोन, एलसीडी, फुटवियर उत्पाद, महंगे बैग या परिधान या आभूषण जैसे उद्योगों में ऐसा सरलता से हो सकता है। आयातक जब भी किसी सामान का देश में आयात करते हैं, तो उस पर एकीकृत जीएसटी (आईजीएसटी) चुकाते हैं।
इस कर के रिफंड का दावा किया जाता है। विश्लेषण के परिणामों के मुताबिक कई बड़ी कंपनियों सहित कई आयातक आयातों पर आईजीएसटी का भुगतान करते हैं, लेकिन उसके लिए क्रेडिट का दावा नहीं करते हैं।
अधिकारियों ने कहा कि इसका यही मतलब निकलता है कि ऐसे आयातित सामानों की आपूर्ति घरेलू बाजार में बिना बिल के की जाती है। महंगे और नुकसान पहुंचाने वाले सामानों पर चुकाए गए उपकर के मामले में भी ऐसी ही स्थिति देखी जा रही है, जिनमें कंपनियां आयात के समय तो इसका भुगतान कर देती हैं, लेकिन इस पर क्रेडिट का दावा नहीं करती हैं।