हाली ही में अनिल अंबानी ने टेलीकॉम कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) के निदेशक पद से इस्तीफा दे दिया था। अब रिलायंस कम्युनिकेशंस के कर्जदाताओं ने कंपनी से अनिल अंबानी तथा चार अन्य के इस्तीफे को नामंजूर कर दिया है। कर्जदाताओं ने अंबानी को दिवाला एवं ऋणशोधन प्रक्रिया में सहयोग करने को कहा है।
कंपनी द्वारा जारी तिमाही नतीजों के अनुसार कंपनी को 30 हजार करोड़ से अधिक का घाटा हुआ था, जो कॉर्पोरेट इतिहास में वोडाफोन-आइडिया के बाद दूसरा सबसे बड़ा घाटा है। इसके बाद ही कंपनी ने बयान जारी करते हुए कहा था कि अनिल अंबानी के अलावा छाया विरानी, रायना कारानी, मंजरी काकेर और सुरेश रंगाचर ने इस्तीफा दे दिया है। इनमें से अनिल अंबानी, छाया विरानी और मंजरी काकेर ने 15 नवंबर को इस्तीफा दिया। वहीं रायना कारानी ने 14 नवंबर और सुरेश रंगाचर ने 13 नवंबर को इस्तीफा दिया था।
मौजूदा समय में रिलायंस कम्युनिकेशंस दिवालिया कानून की प्रक्रिया से गुजर रही है। 2008 में अनिल अंबानी के पास 42 अरब डॉलर की संपत्ति थी, जो 11 साल बाद यानी 2019 में घटकर 5230 मिलियन डॉलर यानी करीब 3651 करोड़ रुपये हो गई है। बता दें कि इस संपत्ति में गिरवी वाले शेयर की कीमतें भी शामिल हैं।
प्राइवेट सेक्टर इन दिनों मंदी की जबरदस्त मार झेल रहा है। कई मल्टीनेशनल कंपनियों पर आर्थिक मंदी का असर साफ दिखाई दे रहा है। इसी कड़ी में देश की अग्रणी कंपनियों में शामिल रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) भी इससे अछूती नहीं है।
कर्ज के बोझ से दबी रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) को जुलाई-सितंबर की तिमाही में करीब 30,142 करोड़ रुपये का एकीकृत घाटा हुआ है। उच्चतम न्यायालय द्वारा सांविधिक बकाये पर फैसले के मद्देनजर देनदारियों के लिए प्रावधान की वजह से कंपनी का घाटा इतना ज्यादा पहुंच गया है।
दिवाला प्रक्रिया में चल रही कंपनी ने इससे पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 1,141 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाया था। उच्चतम न्यायालय के दूरसंचार कंपनियों के सालाना समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) की गणना पर फैसले के मद्देनजर कंपनी ने 28,314 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।