तेल विपणन कंपनियों ने प्रीमियम पेट्रोल की कीमत में दो रुपये प्रति लीटर का इजाफा कर दिया है। औद्योगिक उपयोग वाले थोक डीजल की दरें भी करीब 22 रुपये प्रति लीटर बढ़ाई गईं। तेल विपणन कंपनियों ने कीमतों में यह इजाफा पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण वैश्विक तेल कीमतों में उछाल के बाद किया है।
इंडियन ऑयल ने एक आम सूचना में बताया कि पिछले 20 दिनों में वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में भारी वृद्धि दर्ज की गई है। कच्चे तेल का दाम 71 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 156 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल हो गया है। इस वैश्विक उछाल के बावजूद भारत में ऑटोमोटिव ईंधन की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है।
कंपनी ने बताया कि इंडियन ऑयल ने केवल प्रीमियम पेट्रोल एक्सपी-95 की कीमत में दो रुपये प्रति लीटर की वृद्धि की है। यह प्रीमियम पेट्रोल कुल पेट्रोल बिक्री का लगभग पांच फीसदी है। कंपनी ने देश भर में ईंधन की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि सामान्य पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि प्रीमियम श्रेणी कुल पेट्रोल बिक्री का केवल दो से चार फीसदी है। सरकार आम आदमी पर कोई मूल्य वृद्धि का बोझ नहीं डालना चाहती है। तेल कंपनियां स्वतंत्र रूप से मूल्य निर्धारण का निर्णय लेती हैं। सरकार पेट्रोल और डीजल की कीमतों को विनियमित नहीं करती है।खुदरा पेट्रोल और डीजल की कीमतें अप्रैल 2022 से स्थिर हैं। इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड जैसी कंपनियों ने नुकसान उठाया। जब कच्चे तेल की कीमतें अधिक थीं, तब उन्होंने नुकसान झेला और कम होने पर लाभ कमाया। वित्त वर्ष 2024 में इन कंपनियों ने रिकॉर्ड 81,000 करोड़ रुपये का लाभ दर्ज किया। भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का 88 फीसदी आयात करता है।
डीलरों के माध्यम से प्राप्त जानकारी में कहा गया है, इस ताजा मूल्य वृद्धि का सीधा असर प्रमुख तेल कंपनियों के ब्रांडेड ईंधनों पर देखने को मिला है। इनमें हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचसीएल) का 'पावर पेट्रोल' और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) का 'एक्सपी95' शामिल हैं, जिनकी खुदरा कीमतों में तत्काल प्रभाव से संशोधन किया गया है। उल्लेखनीय है कि प्रीमियम पेट्रोल का उपयोग मुख्य रूप से वाहनों में बेहतर इंजन परफॉरमेंस और अधिक माइलेज प्राप्त करने के उद्देश्य से किया जाता है।
भारत में प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में हुई यह बढ़ोतरी वैश्विक स्तर पर बन रहे युद्ध के हालातों का सीधा परिणाम है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध और तनाव के कारण तेजी से ऊपर जा रही हैं। वैश्विक ईंधन बाजार इस समय भारी अस्थिरता का सामना कर रहा है, जिसका दबाव अब घरेलू बाजार में भी दिखने लगा है।
इसके अतिरिक्त, वैश्विक स्तर पर ईरान संघर्ष को लेकर भी कई घटनाक्रम सामने आ रहे हैं। एक तरफ ब्रिटेन के प्रधानमंत्री स्टार्मर ने ईरान के साथ संघर्ष को खारिज करते हुए 53 मिलियन पाउंड की सहायता योजना की घोषणा की है, वहीं दूसरी ओर जर्मनी ने भी ईरान के खिलाफ कार्रवाई के लिए डोनाल्ड ट्रंप के दबाव को अस्वीकार कर दिया है। इन सभी अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों ने कच्चे तेल की कीमतों को अस्थिर कर दिया है।
संक्षेप में कहा जाए तो, मध्य पूर्व में अमेरिका,इस्राइल और ईरान के बीच जारी भू-राजनीतिक उथल-पुथल ने वैश्विक तेल आपूर्ति शृंखला और कीमतों पर दबाव बढ़ा दिया है। इससे भारत में तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) को प्रीमियम पेट्रोल के दाम बढ़ाने का कदम उठाना पड़ा है।