पारले-जी के नाम से देश भर में सबसे ज्यादा बिस्किट बेचने वाली कंपनी पारले प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड का मुनाफा 15.2 फीसदी बढ़ गया है। कुछ माह पहले पारले ने सबसे पहले सरकार से जीएसटी दरों में कटौती की मांग करते हुए कहा था, कि महंगाई के चलते लोग पांच रुपये वाला पैकेट भी नहीं खरीद रहे हैं।
कंपनी की आय छह फीसदी बढ़कर के 9030 करोड़ रुपये हो गई है। पिछले साल आय 8780 करोड़ रुपये थी। इसी साल कंपनी ने अगस्त में कहा था कि वो 10 हजार लोगों को बाहर का रास्ता दिखाने जा रही है। इसके लिए कंपनी ने बाजार में छाई सुस्ती का हवाला दिया है। कंपनी का कहना था कि लागत के बदले कंपनी की बिक्री काफी कम हो गई है और जीएसटी के चलते उसको काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
कंपनी हर साल 10 हजार करोड़ रुपये के बिस्किट की बिक्री करती है। पारले प्रोडक्ट के कैटेगिरी हेड मयंक शाह ने कहा था कि हम सरकार से जीएसटी कम करने की मांग कर रहे हैं। 100 रुपये प्रति किलो की कीमत वाले बिस्किट पर सबसे ज्यादा जीएसटी लग रहा है। यह बिस्किट पांच रुपये के पैकेट में बेचा जाता है। इससे कंपनी की लागत भी नहीं निकल रही है, जिससे अब लोगों को निकालने के सिवा कोई और रास्ता नहीं बचा है। हालांकि अगर सरकार ने हमारी मांग नहीं मानी तो हमें अपनी फैक्टरियों में काम करने वाले 8,000-10,000 लोगों को निकालना पड़ेगा।
कंपनी हर साल पारले-जी, मोनेको और मेरी गोल्ड बिस्किट का उत्पादन करती है। हाल ही में कंपनी ने प्रीमियम सेगमेंट के लिए भी कूकीज का उत्पादन शुरू किया था। पारले-जी पूरे देश में सबसे ज्यादा बिकने वाला बिस्किट है। कंपनी की पूरे देश में 10 फैक्ट्रियां हैं, जहां पर एक लाख लोग काम करते हैं। इसके अलावा 125 थर्ड पार्टी प्लांट भी हैं, जहां बिस्किट का उत्पादन किया जाता है। कंपनी के उत्पादों की सबसे ज्यादा बिक्री ग्रामीण भारत में होती है।