अडाणी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन लिमिटेड ने एनएसडीएल द्वारा तीन विदेशी फंड्स के खाते फ्रीज करने की खबर का खंडन किया है और कहा है कि यह स्पष्ट रूप से गलत है और निवेश करने वाले समुदाय को जानबूझकर गुमराह करने के लिए किया गया है। लेकिन इससे निवेशकों के हजारों करोड़ रुपये डूब गए हैं। आज एक घंटे के भीतर ही निवेशकों को 55000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड ने तीन विदेशी फंड्स Albula इन्वेस्टमेंट फंड, क्रेस्टा फंड और एपीएमएस इन्वेस्टमेंट फंड के खाते फ्रीज किए। इनके पास अडाणी ग्रुप की चार कंपनियों के 43,500 करोड़ रुपये से ज्यादा मूल्य के शेयर हैं। अब अडाणी के नेतृत्व वाली कंपनी ने इस खबर को गलत बताया है।
अडाणी एंटरप्राइजेज के शेयरों में भारी गिरावट
इस खबर के बाद अडाणी एंटरप्राइजेज के शेयरों में भारी गिरावट आई। उनकी कई कंपनियों में लोअर सर्किट तक लग गया। बिजनेस इनसाइडर की रिपोर्ट के मुताबिक, शुरुआती एक घंटे के कारोबार के भीतर ही कंपनी के शेयरों में 20 फीसदी तक की गिरावट आई थी, जिसकी वजह से अडाणी की संपत्ति में 7.6 अरब डॉलर यानी 55 हजार करोड़ रुपये की कमी आई। अंत में एनएसई पर अडाणी एंटरप्राइजेज का शेयर 5.70 फीसदी नीचे 1,510.35 के स्तर पर बंद हुआ। जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 1,601.60 के स्तर पर बंद हुआ था।
मालूम हो कि जिन तीन कंपनियों के खाते फ्रीज होने की खबर है, उन तीनों की अडाणी एंटरप्राइजेज में 6.82 फीसदी, अडाणी ट्रांसमिशन में 8.03 फीसदी, अडाणी टोटल गैस में 5.92 फीसदी और अडाणी ग्रीन में 3.58 फीसदी हिस्सेदारी है। एनएसडीएल की वेबसाइट के अनुसार, इन खातों को 31 मई को या उससे पहले ही फ्रीज कर दिया गया था। मालूम हो कि खाते फ्रीज होने से फंड न तो अपने खाते के शेयर बेच सकते हैं और न ही नए शेयर खरीद सकते हैं। ये तीन फंड्स बाजार नियामक सेबी में विदेशी पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स के तौर पर रजिस्टर्ड हैं और मॉरीशस से अपना कामकाज चलाते हैं।
इसलिए फ्रीज किए गए खाते
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, इन कंपनियों पर ओनरशिप के बारे में पर्याप्त जानकारी न देने की वजह से कार्रवाई की गई है। प्रीवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत बेनिफिशियल ओनरशिप के बारे में पूरी जानकारी देनी जरूरी है।
साल 2019 कैपिटल मार्केट्स रेग्युलेटर ने एफपीआई के लिए केवाईसी डॉक्युमेंटेशन को पीएमएलए के मुताबिक कर दिया था। फंड्स को 2020 तक नए नियमों का पालन करने का समय दिया गया था। सेबी ने कहा था कि नए नियमों का पालन न करने वाले फंड्स का खाता फ्रीज कर दिया जाएगा। नियमों के अनुसार एफपीआई को कुछ अतिरिक्त जानकारी देनी थी।