देश में कार्यरत कई कंपनियां अब विदेशी ब्रांडों को पीछे करने में लगी हैं। आईटी और उपभोक्ता उत्पाद बनाने वाली कंपनी विप्रो ने जहां हिंदुस्तान यूनिलीवर (एचयूएल) के एक ब्रांड को को पीछे कर दिया है। इससे पहले देशी आईटी कंपनी टीसीएस ने भी आईबीएम को बाजार पूंजीकरण के मामले में पीछे कर दिया था। वहीं टाटा समूह भी विश्व के कई नामी कंपनियों को टक्कर दे रहा है।
संतूर ने दो हजार करोड़ रुपये के टर्नओवर के साथ एचयूएल के लक्स को पछाड़ दिया और अब लाइफ बॉय के सामने चुनौती पेश कर रहा है। एचयूएल की ताजा सालाना रिपोर्ट में लाइफबॉय और लक्स को क्रमशः दो हजार करोड़ और एक हजार करोड़ रुपये से ज्यादा के सेल्स ब्रैकेट में रखा गया था।
विप्रो ने बयान जारी करते हुए कहा कि संतूर की मांग शहरी और ग्रामीण बाजारों में लगातार बढ़ रही है। सिर्फ शहरी बाजारों में संतूर ने 13.4 फीसदी हिस्सेदारी हासिल की और यहां वह लक्स 12 फीसदी और लाइफबॉय 13 फीसदी, दोनों से आगे निकल गया।
टाटा कंसल्टेंसी सर्विस (टीसीएस) ने इसी महीने की 11 तारीख को इतिहास रचते हुए आईबीएम को बाजार पूंजीकरण के मामले में काफी पीछे कर दिया था। उस दिन टीसीएस का बाजार पूंजीकरण जहां 8.37 लाख करोड़ रुपये (12050 करोड़ डॉलर) हो गया है, वहीं आईबीएम का बाजार पूंजीकरण केवल 8.32 लाख करोड़ रुपये (11960 करोड़ डॉलर) था।
टाटा समूह ने भी विदेश में स्थित कई प्रमुख कंपनियों का अधिग्रहण किया। टेटली चाय, जगुआर लैंड रोवर, कोरस, ओक्लॉक जैसे कई विदेशी ब्रांड अब टाटा समूह का हिस्सा हैं।
देश की चार शीर्ष आईटी कंपनियों ने ब्रांड वैल्यू के मामले में बाजी मारी है। पहली बार इस लिस्ट में विप्रो शामिल हुई है। हालांकि यह शीर्ष 10 कंपनियों में सबसे निचले पायदान पर रही है। कंपनियों के ब्रांड की वैल्यू बताने वाली फर्म ब्रांड फाइनेंस ने रिपोर्ट में बताया कि टॉप-10 में टीसीएस के अलावा इंफोसिस, एचसीएल और विप्रो हैं। रोजगार देने वाले भारत के बड़े आईटी दिग्गजों में – टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो, कॉग्निजेंट आदि कंपनियां हैं।