राष्ट्रीय कंपनी विधिक अपीलीय प्राधिकरण ( NCLAT ) ने टाटा संस और साइरस मिस्त्री मामले में कंपनी पंजीयक की याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा है। कंपनी पंजीयक ने एनसीएलएटी के 18 दिसंबर के आदेश में संशोधन का आग्रह किया था। सोमवार को एनसीएलएटी फैसला सुनाएगा। पहले एनसीएलटी का फैसला टाटा संस के पक्ष में आया था, जिसके बाद साइरस फैसले के खिलाफ एनसीएलएटी में चले गए थे। इसके बाद 18 दिसंबर को एनसीएलएटी ने साइरस मिस्त्री के पक्ष में फैसला देते हुए उन्हें फिर से अध्यक्ष बनाने का आदेश दिया था।
एनसीएलएटी ने शुक्रवार तक स्थगित की थी सुनवाई
बता दें कि एनसीएलएटी ने टाटा-मिस्त्री मामले में कंपनी पंजीयक की याचिका पर सुनवाई को शुक्रवार तक के लिए स्थगित कर दिया था। एनसीएलएटी के चेयरमैन न्यायमूर्ति एसजे मुखोपाध्याय की अध्यक्षता वाली दो सदस्यीय पीठ ने कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय को कंपनी अधिनियम के नियमों के तहत निजी और सार्वजनिक कंपनियों की परिभाषा का विवरण जमा करने के लिए कहा है।
एनसीएलएटी की दो सदस्यीय पीठ ने लिया था फैसले
न्यायमूर्ति एसजे मुखोपाध्याय की अगुवाई वाली एनसीएलएटी की दो सदस्यीय पीठ ने अपने फैसले में कहा था कि मिस्त्री के खिलाफ रतन टाटा के उठाए गए कदम परेशान करने वाले थे। पीठ ने नए चेयरमैन की नियुक्ति को भी अवैध ठहराया। अदालत ने यह भी कहा कि टाटा संस को पब्लिक कंपनी से निजी बनाने का फैसला भी गैर कानूनी है और इसे पलटने का आदेश दिया जाता है। यह आदेश चार सप्ताह में लागू होगा और टाटा समूह के पास इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का भी विकल्प है। इसके बाद साइरस मिस्त्री पर NCALT के आदेश के खिलाफ टाटा संस ने उच्च न्यायालय में अपील की।
साइरस मिस्त्री ने इस फैसले पर कहा था कि, ‘आज का फैसला मेरी व्यक्तिगत जीत नहीं है, बल्कि यह अच्छे प्रशासन और अल्पांश शेयरधारकों के अधिकारों की जीत है। इससे मेरा रुख सही साबित होता है।’
टाटा संस के छठे चेयरमैन थे इरस मिस्त्री
साइरस मिस्त्री टाटा संस के छठे चेयरमैन थे और उन्हें इस पद से अक्तूबर 2016 में हटा दिया गया था। रतन टाटा के बाद उन्होंने 2012 में चेयरमैन का पद संभाला था। समूह के 150 साल के इतिहास में मिस्त्री चेयरमैन बनने वाले टाटा परिवार से बाहर के दूसरे व्यक्ति थे।
साइरस मिस्त्री परिवार ने किया था विरोध
बता दें सितंबर 2017 में टाटा संस को पब्लिक से प्राइवेट कंपनी बनाने के लिए शेयरधारकों ने मंजूरी दी थी। उसके बाद रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (आरओसी) ने टाटा संस को निजी कंपनी के तौर पर दर्ज किया था। सायरस मिस्त्री परिवार इसके खिलाफ था क्योंकि निजी कंपनी होने से वे अपने शेयर बाहरी लोगों को नहीं बेच सकते, बल्कि टाटा को ही बेचने पड़ेंगे। जबकि, पब्लिक लिमिटेड कंपनी के शेयरधारक किसी को भी अपनी हिस्सेदारी बेच सकते हैं।