मेक इन इंडिया प्रोग्राम के तहत अभी तक इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में करीब 1.20 लाख करोड़ रुपए का निवेश आ चुका है। यह जानकारी कम्युनिकेशंस एंड आईटी मिनिस्ट्री में अतिरिक्त सचिव अजय कुमार ने दी है।
अजय कुमार ने बताया कि उन्हें देश में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग यूनिट खोलने के लिए अब तक करीब 1.20 लाख करोड़ रुपए के निवेश के ऑफर मिल चुके हैं। साथ ही उनका मानना है कि अगले साल इस आंकड़े में और बढ़ोतरी हो सकती है।
अजय के अनुसार सैमसंग, बॉश, फिलिप्स, एलजी और फ्लेक्सट्रॉनिक्स जैसी कंपनियां भी भारत में अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने में रुचि दिखा रही हैं।
इकोनॉमिक टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक केंद्र सरकार 2016 तक इलेक्ट्रॉनिक्स का कुल आयात शून्य करना चाहती है। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए सरकार देश में मैन्युफैक्चरिंग इकाइयां लगा रही है, जिके लिए काउंटरवेलिंग ड्यूटी के रिइम्बर्समेंट (सीवीडी) और मॉडिफाइड स्पेशल इंसेंटिव पैकेज स्कीम (एम-एसआईपीएस) जैसी सुविधाएं दे रही है।
6.5 लाख करोड़ रुपए का है लक्ष्य
वहीं दूसरी ओर नेशनल पॉलिसी ऑन इलेक्ट्रॉनिक्स (एनपीई) के तहत आयात से निर्भरता को खत्म करते हुए 2020 तक इस सेक्टर में करीब 6.5 लाख करोड़ का निवेश लाना है। साथ ही, इससे करीब 2.8 करोड़ लोगों के लिए नौकरी के मौके देना भी है।
भारत में कारोबार को आसान बनाने के लिए डिपार्टमेंट ऑफ आईटी एंड इलेक्ट्रॉनिक्स तेजी से अपनी योजना के तहत सब्सिडी दे रहा है।
घरेलू मोबाइल निर्माता जैसे कार्बन, माइक्रोमैक्स, लावा, वीडियोकॉन, स्पाइस और सेलकॉन के अलावा चीन की श्याओमी, वीवो और लेनोवो के साथ-साथ कनाडा की डाटा विंड कंपनी ने अपने मोबाइल की असेंबली भारत में शुरू कर दी है।
गुड़गांव की साइबरमीडिया रिसर्च फर्म के अनुसार 2015 की दूसरी तिमाही में 5.66 करोड़ ऐसे मोबाइल फोन बाजार में आए, जो या तो भारत में बने हैं या फिर भारत में असेंबल किए गए हैं। आपको बता दें कि ये आंकड़ा पहली तिमाही में सिर्फ 19.9 प्रतिशत था।