चार महीने तक संकट से जूझने के बाद जेट एयरवेज की उड़ानें बुधवार से बंद हो गईं। आखिरी उड़ान अमृतसर से रात 10.30 बजे मुंबई के लिए थी। जेट ने कहा है कि उड़ानें अस्थायी तौर पर बंद की गई हैं। अब उड़ानें कब शुरू होंगी, यह नीलामी पर निर्भर है। नीलामी में भाग लेने वाली कंपनियों के पास 10 मई तक का समय है। जेट एयरवेज के ऋणदाताओं ने हिस्सेदारी की बिक्री के लिए बोली प्रक्रिया के सफलतापूर्वक पूरी होने की बृहस्पतिवार को उम्मीद जाहिर की है।
नकदी संकट से जूझ रहे एयरलाइन के अपनी सेवाओं को निलंबित करने के बाद कर्ज देने वालों ने ये आशा प्रकट की है। बाजार खुलने से पहले गुरुवार तड़के ऋणदाताओं ने यह घोषणा की। बयान में कहा गया, 'काफी विचार-विमर्श के बाद ऋणदाताओं ने तय किया कि जेट एयरवेज के अस्तित्व को बचाने का सबसे अच्छा तरीका संभावित निवेशकों से पक्की बोलियां प्राप्त करना है, जिन्होंने ईओआई (रुचि पत्र) जमा कराया है और जिन्हें 16 अप्रैल को बोली दस्तावेज जारी किए थे।'
सिविल एविएशन सेक्रेटरी प्रदीप सिंह खरोला ने बताया कि गुरुवार को सभी एयरलाइंस की बैठक बुलाई है, जिसमें यात्रियों के लिए क्या किया जा सकता है, यह तय होगा। मौजूदा सरकार में बंद होने वाली जेट 7वीं एयरलाइन है। इससे पहले एयर पिगेसस, एयर कोस्टा, एयर कार्निवाल, एयर डेक्कन, एयर ओडिशा और जूम एयर भी बंद हुईं। जेट एयरवेज के पास दिसंबर 2018 तक 124 विमान थे। इस साल जनवरी से जेट का संकट गहराने लगा था। महज चार महीने में विमानों की संख्या घटकर पांच रह गई।
तीन महीने से वेतन के लिए तरस रहे जेट एयरवेज के पायलटों ने नौकरी बचाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी गुहार लगाई थी। इससे पहले पायलटों के संगठन नेशनल एविएटर्स गिल्ड (एनएजी) ने कहा थी कि कंपनी का संचालन बंद होता है तो 20 हजार नौकरियां खतरे में पड़ जाएंगी। इस मुश्किल से उबारने के लिए प्रधानमंत्री को हाथ बढ़ाना चाहिए।