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दो साल में 21500 करोड़ घटी कुमार मंगलम बिड़ला की कुल आय

Fri, 22 Nov 2019 03:00 PM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
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कुमार मंगलम बिड़ला
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आइडिया-वोडाफोन की खस्ताहाल हालत की वजह से देश के प्रमुख उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला की नेटवर्थ में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। पिछले दो साल में बिड़ला की नेटवर्थ में 21500 करोड़ रुपये घट गई। 2017 के आखिर से अभी तक नेटवर्थ में एक-तिहाई की कमी आई है। 

वोडाफोन के साथ किया था करार

बिड़ला समूह ने आइडिया को वोडाफोन के साथ मिलाकर के देश की सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनी बनाई थी। इस कंपनी के पास 37 करोड़ ग्राहक हैं। कंपनी ने पिछले हफ्ते ही कॉर्पोरेट इतिहास का सबसे बड़ा घाटा दर्ज किया था। इससे लगा कि दोनों कंपनियां अपने को दिवालिया घोषित कर देंगी। हालांकि समायोजित सकल राजस्व के मुद्दे पर सरकार द्वारा दो साल की राहत मिलने से कंपनी आगे चल पाएगी। वोडाफोन के बाद आदित्य बिड़ला समूह ने भी अपनी टेलीकॉम कंपनी में कोई नया निवेश न करने की घोषणा भी की थी। 

इन कंपनियों की है वोडाफोन-आइडिया में हिस्सेदारी

ब्लूमबर्ग बिलेनियर इंडेक्स के मुताबिक वोडाफोन-आइडिया में 45 फीसदी हिस्सेदारी वोडाफोन की है। वहीं ग्रासिम इंडस्ट्री की 12 फीसदी, बिड़ला टीएमटी की एक फीसदी, हिंडाल्को की तीन फीसदी और 11 फीसदी में बिड़ला समूह की अन्य कंपनियां शामिल हैं। वहीं पब्लिक के पास 29 फीसदी शेयर हैं।  उनकी नेटवर्थ दो साल पहले 9.1 अरब डॉलर थी, अब सिर्फ छह अरब डॉलर (43,056 करोड़ रुपये) है।   

समूह की अन्य कंपनियों पर भी असर

व्यापार युद्ध के कारण बिड़ला समूह की अन्य कंपनियों पर भी असर पड़ा है। ग्रुप की हिस्सेदारी वाली हिंडाल्को इंडस्ट्रीज दुनिया की प्रमुख एल्युमिनियम कंपनी है। समूह के पास देश की सबसे बड़ी सीमेंट कंपनी अल्ट्राटेक सीमेंट भी है, लेकिन विनिर्माण सेक्टर में पिछले कुछ समय से मांग कम रही है।

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हिंडाल्को का मुनाफा जुलाई-सितंबर तिमाही में 33 फीसदी घट गया। एल्युमिनियम और कॉपर की कीमतें घटने की वजह से कंपनी को नुकसान हुआ। हिंडाल्को का शेयर दिसंबर 2017 की प्राइस के मुकाबले अब 31 फीसदी नीचे है। इस दौरान आदित्य बिड़ला ग्रुप की एक और कंपनी ग्रासिम इंडस्ट्रीज के शेयर में 33 फीसदी गिरावट आई।

एजीआर से हुई मुश्किल

कैबिनेट ने वित्तीय संकट से जूझ रही दूरसंचार कंपनियों को राहत देते हुए उनके लिए स्पेक्ट्रम किस्त का भुगतान दो साल के टालने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने फैसले की जानकारी देते हुए कहा, दूरसंचार कंपनियों को 2020-21 और 2021-22 दो साल के लिए स्पेक्ट्रम किश्त भुगतान से छूट दी गई है । सूत्रों के मुताबिक, सरकार के फैसले से दूरसंचार कंपनी भारती एयरटेल, वोडाफोन आइडिया और रिलायंस जियो को 42,000 करोड़ रुपये की राहत मिलेगी।

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने वोडाफोन आइडिया व एयरटेल को झटका दिया था। कोर्ट ने कहा था कि इन कंपनियों को समायोजित सकल राजस्व (एजीआर) का भुगतान करना होगा, जिसके बाद टेलीकॉम कंपनियों को बड़ा झटका लगा है। लेकिन अब वोडाफोन आइडिया की एजीआर संबंधी 44,200 करोड़ रुपये की देनदारी में और बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे कंपनी को अतिरिक्त प्रोविजनिंग करनी पड़ेगी। साथ ही वोडाफोन आइडिया की बैलेंस शीट पर भी दबाव बढ़ेगा।

कंपनी को हुआ 50,921 करोड़ का घाटा

वोडाफोन आइडिया को दूसरी तिमाही में 50, 921 करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। इससे पहले पिछले साल की दूसरी तिमाही में कंपनी को 4,947 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था। यह भारत के कॉर्पोरेट इतिहास में अभी तक का सबसे बड़ा तिमाही घाटा है।

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