कोरोनावायरस दुनियाभर में अपना पैर पसार चुका है। ऐसे में कई जगहों पर तो यह कहर बन कर गिरा है। ऐसे में कोरोनावायरस न सिर्फ लोगों की जान ले रहा है बल्कि, यह दुनियाभर की अर्थव्यवस्था को तहस-नहस करता जा रहा है। इस महामारी का असर भारत में भी देखने को मिल रहा है, जहां अब तक इसके 300 से भी ज्यादा मामले सामने आ चुके हैं। वहीं, कोरोनावायरस का संक्रमण और न फैले इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनता कर्फ्यू के तहत घर पर ही रहने को कहा है। हालांकि, देश के कई बड़े शहरों में स्कूल, मॉल, ऑफिस, जिम, स्पा और रेस्तरां जैसी जगहों को पहले ही बंद करा दिया गया था। ऐसे में इस बंदी का बड़ा असर अब गरीब और छोटे तबकों पर भी पड़ना शुरू हो गया है। दरअसल कोरोना को फैलने से रोकने के लिए पब्लिक प्लेस को बंद कर दिया गया है। ऐसे में इसका असर लाखों सुरक्षा गार्डों की नौकरी पर देखने को मिल सकता है, जो अब खतरे में आ गई हैं।
सेंट्रल असोसिएशन ऑफ प्राइवेट सिक्योरिटी इंडस्ट्री (CAPSI) नाम की एक संस्था ने जो निजी सुरक्षा उद्योग से जुड़ी है, उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इन सुरक्षा गार्ड्स की नौकरी को बचाने के लिए इस मामले में दखल देने को कहा है। इसके लिए संस्थान ने सरकार को चिट्ठी लिखी है, जिसमें कहा गया है कि महामारी से लड़ने के लिए इन निजी गार्डों का भी इस्तेमाल किया जाए। CAPSI ने चिट्ठी में प्रधानमंत्री मोदी से लाखों निजी सुरक्षा गार्डों की नौकरी बचाने की मांग की है।
देशभर में बंदी के बाद कई सुरक्षा गार्डों को हटाने की बात हो रही है। दरअसल जहां पहले कई सुरक्षा गार्ड काम करते थे वहीं, अब एक से दो सुरक्षा गार्ड काम कर रहे हैं। ऐसे में बाकी, गार्डों का क्या होगा यह एक बड़ा सवाल है।
प्रधानमंत्री को लिखी चिट्ठी में CAPSI के अध्यक्ष के विक्रम सिंह ने कहा है कि वो बहुत कम गार्डों के लिए भुगतान करेंगे। ऐसे में दूसरों गार्डों का क्या होगा? और उन्हें वेतन कौन देगा? बता दें कि मौजूदा दौर में 23,000 से अधिक निजी सुरक्षा एजेंसियां देश भर में 85 लाख से अधिक सुरक्षा गार्ड्स को तैनात करती हैं।