जेट एयरवेज की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। जहां एक तरफ कंपनी ने अपने ज्यादा वेतन पाने वाले पायलटों को जबरन छुट्टी पर भेज दिया है, वहीं दूसरी तरफ वो कर्ज की किस्त को जमा करने में चूक गया है।
जेट एयरवेज के सबसे बड़े कर्जदाता भारतीय स्टेट बैंक और कंपनी के संस्थापक नरेश गोयल ने संभावित खरीदारों से बातचीत शुरू कर दी है। फिलहाल टीपीजी कैपिटल और डेल्टा एयरलाइंस इस दौड़ में सबसे आगे हैं।
जेट के फिलहाल 124 में से केवल 35 विमान ही उड़ रहे हैं। ऐसे में उसने अपने ज्यादातर विदेशी पायलटों को जबरन छुट्टी पर भेज दिया है। इस दौरान उनको किसी भी तरह का वेतन भी नहीं मिलेगा। यह पायलट 1 अप्रैल से अगली सूचना मिलने तक काम पर नहीं आएंगे।