मंजूरी के बाद अब बोली आमंत्रित करने के लिए जल्द नोटिस भी जारी किया जाएगा। आईओमजी में वित्त, पेट्रोलियम, विधि, कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय और विनिवेश विभाग के प्रतिनिधि शामिल थे। इस दौरान रूचि पत्र और प्रारंभिक सूचना ज्ञापन ( PIM ) को मंजूरी दी गई। इस संदर्भ में सूत्रों ने कहा कि अब इसे मंजूरी के लिए बनी वैकल्पिक व्यवस्था के समक्ष रखा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद संभावित खरीदारों से बोली आमंत्रित करने को लेकर रूचि पत्र जारी किया जाएगा।
20 नवंबर को लिया था फैसला
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल ने 20 नवंबर को एक रणनीतिक निवेशक को प्रबंधन नियंत्रण के साथ सरकार की पूरी हिस्सेदारी बेचकर बीपीसीएल के निजीकरण का निर्णय लिया था।
54,000 करोड़ रुपये की है सरकार की हिस्सेदारी
बीपीसीएल का बाजार पूंजीकरण 1.03 लाख करोड़ रुपये है। मौजूदा भाव पर इसमें सरकार की हिस्सेदारी करीब 54,000 करोड़ रुपये यानी 53.29 फीसदी है। सफल बोलीदाता को उसी भाव पर 26 फीसदी हिस्सेदारी के अधिग्रहण को लेकर अन्य शेयरधारकों के लिए खुली पेशकश करनी होगी। बीपीसीएल के देशभर में 15,078 पेट्रोल पंप और 6,004 एलपीजी वितरक हैं। दिसंबर 2019 में निवेशकों के लिए अमेरिका, लंदन और दुबई में प्रचार अभियान भी चलाया गया था।
यह है सरकार का लक्ष्य
बता दें कि चालू वित्त वर्ष में सरकार ने विनिवेश के जरिए 1.05 लाख करोड़ रुपये मिलने का लक्ष्य रखा था। हालांकि इस लक्ष्य के पूरे होने की संभावना नहीं है। बजट 2020 के दौरान इस लक्ष्य को संशोधित कर 65 हजार करोड़ रुपये कर दिया गया है। मौजूदा समय में सरकार ने 35 हजार करोड़ रुपये जुटा लिए हैं।
मार्च 2020 तय जताई गई थी बिक्री पूरी होने की संभावना
बीपीसीएल के साथ ही दीपम के अधिकारी ने कहा था कि एयर इंडिया और भारतीय कंटेनर निगम (कॉनकॉर) जैसी कंपनियों का रणनीतिक विनिवेश मार्च 2020 तक पूरा होने की संभावना नहीं है। जबकि उससे पहले बीपीसीएल की बिक्री की प्रक्रिया मार्च तक पूरी होने की संभावना जताई गई थी। सरकार ने बीपीसीएल के निजीकरण के लिए समयसीमा निर्धारित करते हुए कंपनी की परिसंपत्तियों के मूल्यांकन की रिपोर्ट 50 दिन के भीतर देने को कहा था।