फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

इंफोसिसः 6.5 साल में पहली बार 16 फीसदी टूटा शेयर, निवेशकों के डूबे 55 हजार करोड़ रुपये

Tue, 22 Oct 2019 06:04 PM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला

सार

  • व्हिसलब्लोअर की शिकायत का असर, शेयर में साढ़े छह साल की बड़ी गिरावट
  • सीईओ और सीएफओ पर राजस्व और मुनाफा बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने के लगे आरोप 
  • बड़े सौदों में समीक्षाओं और मंजूरियों को दरकिनार करने के भी आरोप
  • इंफोसिस कर रही मामले की जांच, 16 फीसदी टूटा शेयर 
विज्ञापन
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

देश की दूसरी बड़ी सूचना प्रौद्योगिकी कंपनी इंफोसिस के सीईओ और सीएफओ पर राजस्व और मुनाफा बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने के आरोपों से कंपनी के शेयर में लगभग साढ़े छह साल की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इंफोसिस का शेयर लगभग 16.21 फीसदी कमजोर होकर 643.30 रुपये पर आ गया। यह शेयर में अप्रैल, 2013 के बाद की सबसे बड़ी गिरावट है। इससे कंपनी की बाजार पूंजी में लगभग 55 हजार करोड़ रुपये की कमी देखने को मिली।

विज्ञापन


दिन के कारोबार के दौरान इंफोसिस ने लगभग 17 फीसदी की गिरावट के साथ 638.30 रुपये का निचला स्तर छूआ। इंफोसिस चेयरमैन नंदन नीलेकणी ने एक बयान में कहा कि कंपनी की ऑडिट समिति आरोपों पर एक स्वतंत्र जांच कराएगी। 

कंपनी ने इस मसले पर स्वतंत्र आंतरिक ऑडिटर्स ईवाई के साथ बातचीत शुरू कर दी है। नीलेकणी ने कहा कि विधि कंपनी शार्दुल अमरचंद मंगलदास एंड कंपनी को स्वतंत्र जांच का काम सौंप दिया गया है। इससे पारेख और सीएफओ रॉय को अलग रखा गया है। लगभग दो साल पहले भी कंपनी पर प्रशासनिक खामियों के आरोप लगे थे, जिसके चलते तत्कालीन सीईओ विशाल सिक्का को इस्तीफा देना पड़ा था। इसके बाद ही वर्ष 2018 में पारेख ने सीईओ का पद संभाला था।
विज्ञापन


एचडीएफसी सिक्योरिटीज के प्रमुख (खुदरा शोध) दीपक जैसानी ने कहा, ‘कंपनी प्रशासन के मामले में इंफोसिस को बेहतर कंपनी माना जाता रहा है। दो साल में दो शिकायतों से निवेशकों का भरोसा अस्थायी तौर पर हिल गया है।’

बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया मुनाफा

गौरतलब है कि खुद को ‘नैतिक कर्मचारी’ बताने वाले कुछ व्हिशलब्लोअर्स के एक समूह ने इंफोसिस के सीईओ सलिल पारेख पर मुनाफा घटने की आशंका से समीक्षाओं और मंजूरियों को दरकिनार करने का आरोप लगाया। इसका कंपनी के शेयर पर नकारात्मक असर पड़ा। इस पूरे मामले को लेकर व्हिसलब्लोअर ने 20 सितंबर को और अमेरिकी रेग्युलेटर यूएस सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन को 27 सितंबर को पत्र लिखा। 

अरबों डॉलर के सौदों में नहीं हुई कमाई

शिकायत के मुताबिक, ‘पिछली कुछ तिमाहियों के दौरान हुईं अरबों डॉलर के सौदों में कंपनी को कोई मार्जिन नहीं मिला।’ इसका मतलब है कि कंपनी को इन सौदों से कोई मुनाफा नहीं हुआ। इसके साथ ही बेंगलूरू की कंपनी ने मुनाफे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने के लिए वीजा लागत जैसे खर्चों को खाते में शामिल नहीं किया। साथ ही एक सौदे में 5 करोड़ डॉलर के अग्रिम भुगतान के वापस आने को दर्ज नहीं किए जाने के लिए भी दबाव बनाया गया, जो लेखा प्रक्रियाओं के विपरीत है। इस मसले पर सीईओ सलिल पारेख की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।

4019 करोड़ का हुआ था मुनाफा

जुलाई-सितंबर, 2019 तिमाही में कंपनी का मुनाफा 5.8 फीसदी बढ़कर 4,019 करोड़ रुपये हो गया था। वहीं कंपनी ने वित्त वर्ष 2019-20 के लिए गाइडेंस बढ़ाकर 9-10 फीसदी कर दिया था। इससे पहले यह 8.5-10 फीसदी के आसपास रहा था। वहीं का राजस्व 7 फीसदी बढ़कर 23,255 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया था।

विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें