जेट एयरवेज के संकट के बीच एविएशन सेक्टर को देश की सबसे फायदेमंद एयरलाइन इंडिगो के दो प्रमोटरों और सह-संस्थापकों राहुल भाटिया और राकेश गंगवाल के बीच मतभेद की खबर से एक और झटका लगा है। विवाद सुलझाने के लिए दोनों लॉ फर्म के पास पहुंचे हैं। इस बीच इंडिगो के सीईओ रोनो दत्ता ने कर्मचारियों को भरोसा दिलाया है कि एयरलाइन की ग्रोथ स्ट्रेटजी में कोई बदलाव नहीं है। इसे लागू करने में इंडिगो के मैनेजमेंट को कंपनी के बोर्ड का पूरा समर्थन प्राप्त है।
इंडिगो में 38% हिस्सेदारी है। 58 वर्षीय भाटिया इंटरग्लोब एविएशन के ग्रुप एमडी हैं। इनकी नेटवर्थ 21,700 करोड़ रुपए है। भाटिया ऑपरेशनल कॉस्ट कम रखने में महारत रखते हैं। 1991 में उन्हें कारोबार से अलग होना पड़ा।
इंडिगो में 37% हिस्सेदारी है। 66 वर्षीय गंगवाल अमेरिकी नागरिक और इंटरग्लोब एविएशन में नॉन-एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर हैं। इनकी नेटवर्थ 25,200 करोड़ रुपए है। एविएशन इंडस्ट्री में 30 साल से ज्यादा का अनुभव है।
पिछले कई महीने से हिचकोले खा रहे भारतीय विमानन क्षेत्र की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। सस्ती विमानन सेवा देने वाली इंडिगो में मालिकाना हक को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है, जिससे कर्मचारियों में आशंका बढ़ गई है। कंपनी के सीईओ ने बृहस्पतिवार को बयान जारी कर कर्मचारियों को प्रबंधन को लेकर आश्वस्त किया है।
इंडिगो का संचालन करने वाली कंपनी इंटरग्लोब के सीईओ रंजॉय दत्ता ने कहा कि प्रवर्तकों के बीच विवाद के बावजूद वृद्धि को लेकर हमारी रणनीति में कोई बदलाव नहीं आया है। एयरलाइन के प्रबंधन को कंपनी बोर्ड का पूरा सहयोग मिल रहा है।
सीईओ ने कर्मचारियों को भेजे ई-मेल में कंपनी के प्रवर्तकों राहुल भाटिया और राकेश गंगवाल के बीच बढ़ते विवाद पर भी स्थिति स्पष्ट की। कहा, मैं आप सभी को आश्वस्त करना चाहता हूं कि हमारी वृद्धि योजनाओं में कोई बदलाव नहीं आया है और बोर्ड की ओर से प्रबंधन को पूरा सहयोग जारी है। मीडिया में आ रही प्रवर्तकों के बीच विवाद की रिपोर्ट को लेकर आप (कर्मचारी) बिलकुल भी आशंकित न हों। कंपनी सभी शेयरधारकों, उपभोक्ताओं, कर्मचारियों और अन्य संबद्ध लोगों के प्रति अपने मूल्यों को बढ़ाने पर पूरा जोर दे रही है।
सूत्रों के अनुसार, दोनों प्रमोटरों के बीच उस समय मतभेद हुए जब भाटिया को लगा कि गंगवाल एयरलाइन में अपनी टीम बढ़ा रहे हैं, ताकि उनका कंपनी पर ज्यादा नियंत्रण हो सके। विवाद बढ़ने पर दोनों ने अपनी हिस्सेदारी तय करने के लिए जेएसए लॉ फर्म और खेतान एंड कंपनी लॉ फर्म की मदद ली है। गंगवाल की एयरलाइन में करीब 37 फीसदी हिस्सेदारी है, जबकि भाटिया के पास 38 फीसदी हिस्सा है। 2003-04 में गंगवाल और भाटिया ने भारत में साथ मिलकर इंडिगो एयरलाइन की नींव रखी थी।