भारत सरकार कोयला खनन क्षेत्र में ज्यादा से ज्यादा विदेशी कंपनियों को लुभाने के लिए नियमों को लचीला बनाने पर विचार कर रही है। इस क्रम में सरकार कोयला क्षेत्र में पहली बार विदेशी कंपनियों को अग्रिम भुगतान में कमी और बड़े खनन ब्लॉक की पेशकश कर सकती है। हालांकि उद्योग से जुड़े सूत्रों ने कहा कि दिग्गज वैश्विक कंपनियों को लुभाने के लिए यह पर्याप्त नहीं होगा।
अक्तूबर में हुई कोयला खदानों की नीलामी में घरेलू कंपनियों की तरफ से सुस्त प्रतिक्रिया मिली थी, जिनमें 27 में से 21 ब्लॉक ऐसे रहे जिनके लिए जरूरी न्यूनतम तीन बोलियां भी नहीं मिल सकी थीं। इसलिए सिर्फ छह कोयला ब्लॉकों का ही आवंटन हो सका था। उन्होंने कहा, ‘लोग ज्यादा लचीली व्यवस्था की उम्मीद कर रहे थे, इसलिए भागीदारी कम रही। यदि आप भविष्य में कुछ अच्छी पेशकश कर रहे हैं तो लोग इंतजार करेंगे।’
फेडरेशन ऑफ इंडियन मिनरल इंडस्ट्रीज (फिमी) के संयुक्त सचिव बी के भाटिया ने कहा कि अभी तक किसी भी विदेशी कंपनी ने आगामी नीलामी में भाग लेने में दिलचस्पी नहीं दिखाई है। फिमी देश का सबसे बड़ा माइनिंग लॉबी ग्रुप है, रिओ टिंटो और वेल एसए जैसी विदेशी कंपनियों की भारतीय इकाइयां भी इसकी सदस्य हैं। एक बड़ी खनन कंपनी के एक अधिकारी ने कहा, ‘आप जब तक भारत से बाहर कोयला बेचने की छूट नहीं देते हैं, तब तक बड़ी कंपनियां इसमें दिलचस्पी नहीं लेंगी।’ उन्होंने कहा कि यह निविदाओं पर निर्भर करता है। यदि वे जिद्दी बने रहते हैं, तो बिना मार्जिन मिले कोई भी विदेशी कंपनी काम नहीं करना चाहेगी।
हालांकि रूसी या पॉलिश कंपनियों को यहां पर बढ़त मिल सकती हैं, क्योंकि उन्हें ज्यादा ऐश वाली भूमिगत खदानों में काम करने का खासा अनुभव है। तिवारी ने कहा, ‘रूसी कंपनियां पहले ही भारत में कारोबार के लिए खासी दिलचस्पी दिखा चुकी हैं।’ हालांकि उन्होंने इस निविदा में भारतीय दिग्गज कंपनी अडानी एंटरप्राइजेज के भाग लेने की उम्मीद भी जाहिर की।