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भारत की विकास दर होगी 6.3 फीसदीः यूएन

Fri, 12 Dec 2014 08:58 AM IST
एजेंसी
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संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत की अर्थिक विकास दर 2016 तक बढ़कर 6.3 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। दक्षिण एशियाई देशों में सबसे तेज रिकवरी को देखते हुए यह आकलन किया गया है।
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बुधवार को जारी संयुक्त राष्ट्र वैश्विक आर्थिक स्थिति एवं अनुमान 2015 (वेस्प) रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत आर्थिक नीति में सुधार लागू करने और कारोबार एवं उपभोक्ता विश्वास को समर्थन प्रदान करने की दिशा में प्रगति कर सकता है।
रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि वैश्विक आर्थिक संकट के प्रभावों का असर अभी बने रहने तथा यूक्रेन और इबोला जैसे नए संकटों के बावजूद वैश्विक आर्थिक वृद्धि में तेजी का सिलसिला दो साल से अधिक समय तक बना रहेगा।
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वैश्विक आर्थिक विकास दर 2015 में 3.1 फीसदी और 2016 में 3.3 फीसदी रहने की उम्मीद है। 2014 में यह 2.6 फीसदी रह सकती है। रिपोर्ट में कहा गया कि 2014 में भारत की विकास दर 5.4 फीसदी रहने की उम्मीद है कि जो अगले साल बढ़कर 5.9 प्रतिशत और 2016 में 6.3 प्रतिशत रहेगी।

दक्षिण एशिया की आर्थिक वृद्धि में भी धीरे-धीरे तेजी आने की उम्मीद है। वर्ष 2014 में इसके 4.9 फीसदी, 2015 में 5.4 प्रतिशत और 2016 में 5.7 फीसदी तक पहुंचने का अनुमान रिपोर्ट में जताया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि एशिया क्षेत्र में सुधार का नेतृत्व भारत करेगा, जिसका क्षेत्रीय उत्पादन में करीब 70 प्रतिशत योगदान है। बांग्लादेश और ईरान जैसी अर्थव्यवस्थाओं में भी आलोच्य अवधि में अच्छी वृद्धि होने की उम्मीद है।

2016 के लिए भारत की आर्थिक विकास दर के 6 फीसदी के करीब रहने की उम्मीद है, जो 2008-2011 के बाद सबसे अधिक है। उस समय यह आंकड़ा 7.3 फीसदी के स्तर पर था। 2012 में बढ़ोतरी की रफ्तार घटकर 4.7 फीसदी पर आ गई।

2014 में चीन समेत पूर्वी एशियाई देशों में अपेक्षाकृत अच्छी तेजी रही। जबकि भारत के नेतृत्व में दक्षिण एशियाई देशों की विकास दर ठीक-ठीक रही। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2015 में विकासशील देशों की विकास दर 2015 में 4.8 फीसदी पर रहने का आकलन है और 2016 में यह आंकड़ा 5.1 फीसदी पर जा सकता है।

 2014 में इसके 4.3 फीसदी पर रहने की संभावना है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत सहित कई देशों में आर्थिक सुधार के कार्यक्रम चल रहे हैं, जिससे कारोबारी और उपभोक्ता भरोसे में बढ़ोतरी होगी।
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