विदेशी संस्थागत निवेशकों ने बजट के बाद पिछले एक माह में 15 लाख करोड़ रुपये निकाल लिए हैं। इससे ब्लू चिप कंपनियों को सबसे ज्यादा झटका लगा है। हालांकि अब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पीएमओ के दखल के बाद कई सेक्टर के कारोबारियों से मिलेंगी, जिससे लगता है कि सरकार अपने विदेशी संस्थागत निवेशकों पर ज्यादा कर लगाने के फैसले को बदल सके।
विदेशी निवेशकों (एपपीआई) ने अगस्त के पहले दो कारोबारी सत्रों में कैपिटल मार्केट से 2,881 करोड़ रुपये निकाल लिए। एफपीआई ने 1-2 अगस्त को शेयर बाजार में 2,632.58 करोड़ और डेट मार्केट में 248.52 करोड़ रुपये की बिकवाली की।
रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर सोमवार से तीन फीसदी गिर गया। क्रेडिट रेटिंग कंपनी क्रेडिट सुइस ने रिलायंस की रेटिंग में 26 फीसदी की कटौती कर दी थी। एफपीआई फरवरी से जून तक लगातार खरीदार रहे थे। लेकिन, बजट में सुपर रिच पर टैक्स बढ़ने के एलान के बाद बिकवाली तेज हो गई। अर्थव्यवस्था में सुस्ती, कमजोर मानसून और कई कंपनियों के तिमाही नतीजे कमजोर रहने की वजह से भी सेंटीमेंट बिगड़ गए।
लोकसभा ने बजट के दौरान पेश किए गए वित्त विधेयक को अपनी मंजूरी दे दी है। विधेयक के प्रावधानों के मुताबिक अब ट्रस्ट के तौर पर रजिस्टर्ड फॉरेन पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) को भी टैक्स देना होगा। कंपनी के तौर पर रजिस्टर्ड एफपीआई पर टैक्स रेट बढ़ने का असर नहीं पड़ेगा और एफपीआई ट्रस्ट के बजाय कंपनी के तौर पर फिर से अपना रजिस्ट्रेशन कराने पर विचार कर सकते हैं। सरकार का यह फैसला बाजार को रास नहीं आया।