सरकार ने आईएलएंडएफएस मामले की जांच का जिम्मा धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ) को सौंप दिया है। बताया जाता है कि इस मामले में सरकार ने 2009 के सत्यम घोटाले से जुड़ी रिपोर्ट तलब की है, लेकिन दुर्भाग्य की बात की यह रिपोर्ट मिल नहीं रही है। सूत्र बताते हैं कि रिपोर्ट दीमक चट कर गए हैं।
आईएलएंडएफएस से जुड़े कुछ अहम तथ्य
- - करीब 91,000 करोड़ रुपये का कर्ज
- - कर्ज का बड़ा हिस्सा 10,198 करोड़ रुपये का ऋण पत्र
- - सरकार के ऊपर भी करीब 17,000 करोड़ रुपये की देनदारी
- - 250 से भी ज्यादा अनुषंगी इकाई और संयुक्त उपक्रम
- - बीते महीने सिडबी का 1,000 करोड़ रुपये का किस्त चुकाने में विफल
- - अगले छह महीने में 3,600 करोड़ रुपये की चुकानी है किस्त
- - जिन परियोजनाओं का वित्तपोषण किया, उनमें से 17,000 करोड़ रुपये की परियोजनाएं अटकीं
डिफॉल्ट किया एक और पेमेंट
आईएलएंडएफएस ने एक और पेमेंट डिफॉल्ट किया है। 30 सितंबर से 4 अक्टूबर के बीच आईएलएंडएफएस ने 33.9 करोड़ रुपये के कॉरपोरेट डिपॉजिट पेमेंट का डिफॉल्ट किया है। आईएलएंडएफएस मामले पर आरबीआई ने भी चिंता जताई है।
क्रेडिट पॉलिसी के दौरान गवर्नर उर्जित पटेल ने कहा कि आईएलएंडएफएस मामले पर मैनेजमेंट से बातचीत की जा रही है। वहीं कल आईएलएंडएफएस के नए बोर्ड की पहली बैठक में उदय कोटक ने भी माना था कि आईएलएंडएफएस ग्रुप की समस्या सत्यम से भी बड़ी है।