घड़ी के बाजार में अपने नाम की धूम मचाने वाली कंपनी एचएमटी आज बदहाली के कगार पर पहुंच चुकी है। कंपनी की छह इकाइयों का घाटा लगभग 21 सौ करोड़ रुपए पहुंच चुका है, जिस कारण कंपनी इनको बंद करने पर विचार कर रही है।
एचएमटी वाच की बदहाली को लेकर बंगलूरू में पांच मई को बैठक बुलाई गई थी, इसमें छह इकाइयों के यूनियन के पदाधिकारी मौजूद थे।
कंपनी में एक हजार से अधिक कर्मचारी हैं, जिसमें 530 रानीबाग में, 343 तुंगपुर में, 46 मुख्यालय (हेड आफिस) में, 55 बंगलूरू प्रथम-द्वितीय में और 61 कर्मचारी मार्केटिंग में हैं। इन कर्मियों को वीआरएस (स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना) देने के साथ ही बचे कर्मियों को वीएसएस (वालेंटरी सेपरेशन स्कीम) देने पर विचार हुआ।
कर्मियों को 2007 का पे-स्केल, 120 दिन की जगह 180 दिन के ईएल (अर्न लीव), वीआरएस के दौरान मिलने वाली राशि पर आयकर माफ करने और अंतरिम राहत की राशि कटौती न करने पर विचार हुआ है।
सूत्रों की मानें तो प्रबंधन ने कर्मचारियों को अधिक लाभ देने के लिए कमेटी का गठन किया है, जिसे दस दिनों में कर्मचारी हितों से जुड़ी उक्त प्रारूप से मिलती-जुलती तीन अलग-अलग प्रकार की रिपोर्ट देनी है। इस पर दिसंबर तक अमल होना है। हालांकि, केंद्र की नई सरकार को अंतिम फैसला लेना है। बैठक में भारी उद्योग मंत्रालय के संयुक्त सचिव,एचएमटी के निदेशक डॉ. वेंकटेश, चेयरमैन गिरीश कुमार और प्रबंध निदेशक वॉच पाल राज आदि थे।
1982 में पड़ी थी रानीबाग की नींव
हल्द्वानी। वर्ष 1982 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और उद्योग मंत्री नारायण दत्त तिवारी ने रानीबाग इकाई की नींव रखी थी। 1985 में प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी ने प्रोडक्शन का शुभारंभ किया।
•देश की छह इकाइयों का घाटा 2100 करोड़ रुपए
•कर्मचारियों को वीएसएस पर चल रहा है विचार
•कमेटी बनाई, दस दिन में उनसे मांगी गई रिपोर्ट
एनडीए सरकार में मिला था पैकेज
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में नारायण दत्त तिवारी लोक लेखा समिति के अध्यक्ष थे। उस समय एचएमटी ग्रुप के रिवाइवल के लिए लगभग एक हजार करोड़ रुपए मिले थे।