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जेट एयरवेज में निवेश के लिए तैयार हुए हिंदुजा बंधु, नरेश गोयल की होगी वापसी

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Updated Tue, 21 May 2019 01:40 PM IST
हिंदुजा
आखिरकार एतिहाद की कोशिश रंग लाई और ब्रिटेन के सबसे ज्यादा अमीर हिंदुजा बंधु जेट एयरवेज को फिर से हवा में उड़ान भरने के लिए राजी हो गए हैं। हिंदुजा बंधु नरेश गोयल को भी बोर्ड में फिर से वापस लाने पर सहमत हैं। 

बैंकों से शुरू की बातचीत

हिंदुजा बंधु--जीपी हिंदुजा और अशोक हिंदुजा ने एसबीआई कैपिटल मार्केट की अगुवाई वाले बैंकों के कंशोर्सियम से इस बारे में बातचीत शुरू कर दी है। हिंदुजा बंधुओं द्वारा इस बातचीत के जेट एयरवेज के संस्थापक नरेश गोयल की भी सहमति है। नरेश गोयल और हिंदुजा बंधुओं के बीच दो दशक से भी ज्यादा समय से पुराने संबंध हैं। 

जेट को कर सकते हैं खड़ा 

हिंदुजा बंधुओं को हाल ही में ब्रिटेन के सबसे अमीर शख्स होने का ताज मिला है। दोनों भाइयों की कुल संपंत्ति 22 अरब पाउंड है। जेट को रिवाइव करने के लिए वो आसानी से 15 हजार करोड़ रुपये निवेश कर सकते हैं। 

एतिहाद करेगा केवल 1700 करोड़ रुपये निवेश

जेट एयरवेज में एतिहाद केवल 24 फीसदी हिस्सेदारी के लिए 1700 करोड़ रुपये का निवेश करेगा। उसने यह भी साफ कर दिया है कि वो जेट की देनदारी को पूरा नहीं करेगा। उसने बैंकों से कह दिया है कि वो 8500 करोड़ के कर्ज में 70-80 फीसदी कर्ज को माफ करे।
 

हिंदुजा समूह ने की थी एयर इंडिया को खरीदने की कोशिश

हिंदुजा समूह पहले भी एयर इंडिया को खरीदने के लिए 2001 में तैयार हुआ था, लेकिन तब विनिवेश की प्रक्रिया फेल हो गई थी। हिंदुजा समूह फिलहाल विश्व में दस अलग-अलग सेक्टर में व्यापार करता है जिसमें ऑटोमेटिव, तेल व केमिकल, मीडिया, आईटी, बिजली संयंत्र, स्वास्थ्य और रियल एस्टेट शामिल हैं। भारत में दूसरे नंबर पर ट्रक बेचने वाली कंपनी आशोक लीलैंड भी इसी के स्वामित्व में है। 

जेट के पास नहीं बचा है ज्यादा समय

जेट के पास फिलहाल काफी कम समय बचा है। ऐसा इसलिए क्योंकि उसके पायलटों को दूसरी कंपनियां नौकरी पर रख रही हैं। इसके साथ ही जेट एयरवेज के बंद होने से खाली पड़े स्लॉटों पर दूसरी विमानन कंपनियां की नजर है। फिलहाल एयर इंडिया को जेट के 50 फीसदी विदेशी रूट पर संचालन करने का अधिकार मिल गया है। 

इससे पहले एसबीआई के अध्यक्ष रजनीश कुमार ने पिछले दिनों कहा था कि जेट को लेकर एक सप्ताह में स्थिति साफ हो जाएगी। एयरलाइन का शुमार देश की सबसे बड़ी निजी विमानन कंपनी में होता था। उस पर करीब 12,000 हजार करोड़ रुपये का कर्ज है।

लो बजट एयरलाइन इंडिगो, स्पाइसजेट और वाडिया समूह के गो एयर को टक्कर देने की कोशिश में कंपनी का नुकसान बढ़ता चला गया। हाल ही में जेट के सीईओ विनय दूबे, सीएफओ और डिप्टी सीएफओ सहित कई शीर्ष कर्मचारियों ने अपने-अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। 

कर्मचारियों ने किया प्रदर्शन

जेट के करीब 200 कर्मचारियों ने कंपनी के पुनरुद्धार और बकाया वेतन के भुगतान की मांग को लेकर मंगलवार को नागर विमानन मंत्रालय के सामने प्रदर्शन किया। इस दौरान विमानन कंपनी के तीन कर्मचारियों ने नागर विमानन मंत्रालय के संयुक्त सचिव एसके मिश्रा से मुलाकात की।

मुलाकात करने वाले कर्मचारियों में शामिल आशीष कुमार मोहंती ने बताया, ‘हमने उन्हें जेट के वर्तमान अंदरूनी हालात से अवगत कराया... हमें पांच महीने से वेतन नहीं मिला है। राजस्व की कमी का हवाला देकर प्रबंधन ने हमारा मेडिकल कवरेज भी रोक दिया गया है।’ मोहंती के अनुसार, संयुक्त सचिव ने कहा कि वह अपने शीर्ष अधिकारियों से कर्मचारियों की चिंता को लेकर बात करेंगे। 
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