टाइटैनिक बनाने वाली कंपनी हार्लेंड एंड वोल्फ शिपयार्ड 158 साल बाद बंद होने जा रही है। कंपनी पिछले कई सालों से घाटे में चल रही है। इसके अतिरिक्त प्रतिस्पर्धा के कारण भी कंपनी डूब चुकी है और इसी वजह से कंपनी पर जल्द ताला लग सकता है।
कंपनी में काम करते थे 35,000 लोग
हार्लेंड एंड वोल्फ शिपयार्ड ने साल 1909 से 1911 के बीच टाइटैनिक जहाज बनाया था। आज से करीब 100 साल पहले कंपनी में 35,000 लोग काम करते थे। अब दिवालिया हो चुकी कंपनी में महज 123 लोग ही बचे हैं।
दूसरे विश्व युद्ध के दौरान बनाए थे युद्धपोत
टाइटैनिक जहाज के अतिरिक्त कंपनी ने दूसरे विश्व युद्ध के दौरान लगभग 150 से ज्यादा युद्धपोत भी बनाए थे। साल 1945 के बाद से कंपनी ने जहाज का निर्माण कम कर दिया था। बंद होने से पहले यह कंपनी पनविद्युत और समुद्री इंजीनियरिंग परियोजनाओं पर काम कर रही थी।
आइसबर्ग से टकराया था टाइटैनिक जहाज
टाइटैनिक जहाज को उत्तरी आयरलैंड के बेलफास्ट में 31 मार्च, 1911 को लॉन्च किया गया था। कंपनी द्वारा बनाया गया विशाल जहाज टाइटैनिक अपनी पहली ही यात्रा में आइसबर्ग से टकराकर समुद्र में डूब गया था। यह दुर्घटना समुद्री इतिहास के सबसे भीषण दुर्घटनाओं में से एक है। इसमें करीब 1,517 लोग मारे गए थे। टाइटैनिक जहाज साउथेम्प्टन बंदरगाह से न्यूयॉर्क जा रहा था। एक सितंबर 1985 को अमेरिकी नौसेना के पूर्व कमांडर और महासागर विज्ञान के प्रोफेसर रॉबर्ट डुआने बालार्ड ने जहाज का मलबा खोजा था। जहाज में 2,229 लोग सवार थे लेकिन कम लाइफबोट होने के कारण कुछ ही लोगों की जान बच पाई थी। टाइटैनिक उस समय के सबसे अनुभवी इंजीनियरों के द्वारा डिजाइन किया गया था और इसके निर्माण में उस समय में उपलब्ध आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल हुआ था।