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नकारा लोगों से खुद को दूर रखा है : सलिल सतीश पारेख

Sat, 09 Dec 2017 11:19 AM IST
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला डिजिटल, नई दिल्ली
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Salil S Parekh
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मैं मानता हूं कि बाजार की अनिश्चितता का नतीजा कैसा भी हो, लेकिन नेतृत्व क्षमता का विकास इन्हीं परिस्थितियों में होता है। मैं जो काम करता हूं, उसमें खुद को बेहतर करना मेरी बाकी सभी प्राथमिकताओं से बढ़कर रहा है।
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साठ के दशक के मध्य में मेरा जन्म एक गुजराती परिवार में हुआ था। 1986 में भारत के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थान, आईआईटी मुंबई से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की डिग्री लेने के बाद मैंने अमेरिका की कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर सांइस में परास्नातक किया है।

पढ़ाई पूरी करने के बाद पेरिस स्थित एक प्रमुख आईटी कंपनी कैपजेमिनी से जुड़ने से पहले मैं कुछ वर्षों तक दूसरी कंपनियों के लिए काम करता रहा। मुझे वहां एशिया-पैसिफिक जोन का डायरेक्टर बनाया गया था, पर अपने काम की बदौलत मैं आगे चलकर कैपजेमिनी के वैश्विक वित्तीय सेवाओं की इकाई का मुख्य कार्यकारी अधिकारी के पद तक पहुंच गया।
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पिछली कंपनी के लिए बहुत किया है
मैंने अपनी पिछली कंपनी को अपनी जिंदगी के ढाई दशक दिए हैं। इस दौरान मुझे वैश्विक स्तर पर काम करने का अवसर मिला। मेरे कार्यकाल में भारत और अमेरिका में कंपनी का बिजनेस बढ़ा। मेरी योजनाओं का ही नतीजा निकला कि कंपनी ने उम्मीद से 10 गुना ज्यादा तरक्की की।

इस सबके बावजूद मेरी पिछली कंपनी कैपजेमिनी ने मेरे सिवा दो अन्य एग्जिक्यूटिव को जॉइंट चीफ ऑफिसर बना दिया था, जिससे ग्लोबल सीईओ बनने की मेरी संभावनाओं को धक्का लगा।
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गढ़े हैं सफलता के अपने मंत्र

इंफोसिस
हालात कैसे भी रहे हों, मैंने हमेशा अपने दिमाग को शांत रखने की कोशिश की है। मैं मानता हूं कि बाजार की अनिश्चितता का नतीजा कैसा भी हो, लेकिन नेतृत्व क्षमता का विकास इन्हीं परिस्थितियों में होता है। मैंने अपने संस्थान को जितना समझा है, उतनी ही बाहर की दुनिया देखी है। क्लाइंट के साथ वक्त बिताया है। मैं अपने साथ काम करने वाले सहयोगियों से कुछ नहीं छिपाता हूं। मैंने हमेशा से ही अच्छे लोगों को ही अपने साथ रखा है और नकारा यानी नॉन-परफॉर्मिंग लोगों से दूरी बनाकर रखी है। मैं जो काम करता हूं, उसमें खुद को बेहतर करना मेरी बाकी सभी प्राथमिकताओं से बढ़कर रहा है।

ग्लोबल पोर्टफोलियो वाला भारतीय
मैंने कैपजेमिनी के लिए काम करते हुए काफी समय भारत में बिताया है। मैं भारत के बाजार को अच्छी तरह समझता हूं और यह बात मेरे नए चयन के पीछे एक बड़ी वजह रही। इंफोसिस को उसी व्यक्ति की तलाश थी, जो भारतीय कंपनी संस्कृति के हिसाब से काम करने में सहज हो और बंगलूरू में रहकर काम करने में कोई दिक्कत न हो। मुझे उन गिने-चुने भारतीयों में शामिल किया जाता है, जिनका ग्लोबल पोर्टफोलियो है।

अनेक चुनौतियों से पार पाना है
आईटी सेवाएं प्रदान करना उत्पादों से जुड़े दूसरे कामों से बहुत ही अलग व्यवसाय है। और शायद इंफोसिस जैसी भारतीय फर्म के लिए लगातार एक जैसा काम करना अच्छा विचार नहीं हो सकता है। मेरे लिए अगली चुनौती इंफोसिस के संस्थापक नारायणमूर्ति और कंपनी के प्रबंधकों को साथ लेकर चलना है। साथ ही कंपनी के घटते राजस्व और गिरते शेयरों को संभालना भी मेरी जिम्मेदारी है। मुझे पूरी उम्मीद है कि जनवरी से शुरू हो रहे मेरे कार्यकाल में इंफोसिस की छवि एक बार फिर आईटी क्षेत्र में वही हो जाएगी, जिसके लिए वह जानी जाती है।

-पारेख आईटी कंपनी इंफोसिस के नवनियुक्त सीईओ हैं।
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