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प्रोत्साहन से इलेक्ट्रॉनिक उद्योग को पंख लगाएगी सरकार: रविशंकर प्रसाद

Mon, 28 May 2018 11:43 AM IST
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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केंद्र सरकार इलेक्ट्रॉनिक उद्योग को बढ़ावा देकर देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी मेक इन इंडिया के उत्पादों का परचम लहराने की योजना पर आगे बढ़ रही है। इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय डिजिटल इंडिया अभियान की तमाम तस्वीरों को उकेर कर देश में इसका एक पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करने में जुटा है। दोनों क्षेत्रों की गतिविधियों और भविष्य में उठाए जाने वाले कदमों सहित अन्य मुद्दों पर पीयूष पांडेय की केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद से बातचीत हुई। पेश है बातचीत के मुख्य अंश :
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प्रश्न- इलेक्ट्रॉनिक नीति से किस तरह घरेलू उद्योग को सहायता मिलेगी?
उत्तर  - इलेक्ट्रॉनिक नीति और उद्योग मेक इन इंडिया का बहुत बड़ा केंद्र बन रहा है। इस नीति को जल्द ही अंतिम रूप मिलने जा रहा है। आईटी मंत्रालय इसमें इलेक्ट्रॉनिक निर्यात को प्रोत्साहन देने पर विचार कर रहा, ताकि मेक इन इंडिया को प्रोत्साहन मिले और देश ही नहीं, बल्कि पड़ोसी देशों, आसियान और मध्य-पूर्व जैसे बड़े बाजारों तक पहुंच बने। वह दिन दूर नहीं, जब इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की मांग और खपत दोनों बढ़ने वाली है।

अब हमारी कोशिश है कि इस क्षेत्र में भारत को हम निर्यात का भी एक हब बनाएं। हमे विश्वास है कि भारत में निर्मित इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद देश ही नहीं, बल्कि विदेशों की जरूरतों को भी पूरा करेंगे। आने वाले दिनों में देश में 50 करोड़ मोबाइल फोन बनेंगे। जल्द ही प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (पीसीबी) का काम शुरू होने जा रहा है। सरकार की ओर से लावा, सैमसंग समेत अन्य को इसके लिए मंजूरी दी जा चुकी है।
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प्रश्न - सीएससी से ग्रामीण क्षेत्र को क्या फायदा है और इसका वास्तविक रूप क्या है?
उत्तर - सामान्य सेवा केंद्र का आंदोलन हमारा बहुत ही आगे बढ़ गया है। जब सरकार आई थी, तब देशभर में महज 83,000 सीएससी थे और आज इनकी संख्या 2.91 लाख हो गई है। ये लगभग 2 लाख ग्राम पंचायतों में हैं, जो जल्द ढाई लाख हो जाएंगे। इनमें 10 लाख लोग काम करते हैं।

ये बैंकिंग, बीमा और डिजिटल शिक्षा का काम कर रहे हैं। हमें दो साल में छह करोड़ लोगों को डिजिटल साक्षर करना है और अब तक एक करोड़ लोगों को साक्षर किया जा चुका है। डिजिटल इंडिया के लिए पूरा पारिस्थितिकी तंत्र तैयार हो रहा है।

देशभर में 232 ई-हॉस्पिटल हैं, जिनमें दो करोड़ मरीज आते हैं। ई-स्कॉलरशिप के तहत करीब दो करोड़ बच्चों को पांच हजार करोड़ रुपये का वजीफा मुहैया कराया गया है। जीवन प्रमाणन जैसी प्रक्रिया लोगों की सहूलियत और सरकार की सहायता व सेवा को सीधे उन तक पहुंचाने के लिए है।
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छोटे शहरों में बीपीओ स्थापित करने की योजना किस हद तक कामयाब है?

उत्तर - छोटे शहरों में बीपीओ लगाने का फायदा क्षेत्रीय युवाओं को मिल रहा है। देश के ऐसे 89 स्थानों पर पर बीपीओ शुरू हो गए हैं। ये शहर कोहिमा, इंफाल, पटना, श्रीनगर, समस्तीपुर, बरेली, लखनऊ, कानपुर और भिवंडी है। आने वाले दिनों में गया, जहानाबाद, देवरिया और गाजीपुर में भी बीपीओ खुलने जा रहे हैं। डिजिटल समावेशी विकास हो रहा है और युवाओं को रोजगार मिल रहा है। इसी तरह हम गांवों में वाई-फाई की योजना ला रहे हैं, ताकि डिजिटल साक्षरता तेजी से बढ़े और हमारा हर नागरिक दुनिया के साथ कदम से कदम मिलाकर चले।
 
प्रश्न - आईटी क्षेत्र में नौकरियां कम होने के कथित दावे में कितनी सच्चाई है और इस बारे में आपका क्या कहना है?
उत्तर - नैसकॉम की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले तीन साल में 6 लाख लोगों को नई नियुक्तियां मिली हैं। एक लाख नियुक्तियां तो 2017-18 में हुई हैं। देश में जिस तेजी से डिजिटल इको-सिस्टम बढ़ रहा है, उससे नौकरियों में तेजी से बढ़त होगी।

अगर यह सवाल कुल नौकरियों या रोजगार पर है, तो सरकार ने 12 करोड़ लोगों को मुद्रा लोन दिया है। उनमें से अगर आधे ने भी एक अतिरिक्त व्यक्ति को काम दिया है, तो इस हिसाब से छह करोड़ लोगों को रोजगार मिला। यह सब वे लोग हैं, जो हाशिए पर रहने वाले हैं। इसके अलावा, सड़क निर्माण समेत अन्य क्षेत्रों में लोग काम कर रहे हैं। डिजिटिल अर्थव्यवस्था में हम अगले 5 से 7 साल में 50 हजार से 70 लाख लोगों की नौकरी की अपेक्षा करते हैं।

प्रश्न - साइबर सुरक्षा और डाटा सुरक्षा पर सरकार क्या कदम उठा रही है?
उत्तर - साइबर सुरक्षा पर हम गंभीरता से सक्रिय हैं। खुद प्रधानमंत्री ने कहा है कि साइबर वार रक्तविहीन युद्ध है। इसलिए, दुनियाभर में इसके लिए एकजुटता होनी चाहिए। देश में हम पुलिस, जजों व अन्य को प्रशिक्षण दे रहे हैं।

हमने भारतीय कंप्यूटर आपातकालीन रिस्पॉन्स टीम (सर्ट-इन) को मजबूत किया है और वित्तीय क्षेत्र के लिए अलग सर्ट-इन बना रहे हैं। हमने एक बॉटनिट क्लीनिंग का तंत्र बनाया है। इसके अलावा, हम जागरूकता फैला रहे हैं। जहां तक डाटा का सवाल है, तो इस पर हमारी दो सोच है। एक तो डाटा संरक्षण के लिए कानून होना चाहिए। उसके लिए जस्टिस श्रीकृष्णा समिति काम कर रही है और जून तक रिपोर्ट आने की उम्मीद है। उसके आधार पर हम एक प्रभावी कानून बनाएंगे। दूसरा डाटा विश्लेषण, जिसके तहत हम चाहते हैं कि भारत डाटा अन्वेषण का एक बड़ा केंद्र बने। इस पर भी मंत्रालय काम कर रहा है।

प्रश्न - कैंब्रिज एनालिटिका बंद हो गई है, क्या उसका जवाब सरकार को मिला और सरकार उससे संतुष्ट है?
उत्तर - कैंब्रिज एनालिटिका के जवाब की प्रतीक्षा सरकार कर रही है। फेसबुक ने तो हमारे नोटिस के बाद अगले ही दिन माफी मांग ली थी। हम सोशल मीडिया की आजादी के पक्षधर हैं, लेकिन अगर कोई देश के चुनाव की पारदर्शिता को प्रभावित करने का प्रयास करेगा, तो हम यह बर्दाश्त नहीं करेंगे। हमें अपने लोकतंत्र पर बहुत गर्व है।

प्रश्न -क्रिप्टो करेंसी पर सरकार आगे क्या कदम उठा रही है?
उत्तर - हर देश की अपनी एक करेंसी होती है और उसकी जिम्मेदारी तय होती है। लेकिन क्रिप्टो करेंसी का दायित्व कौन लेगा। यह बहुत बड़ा मुद्दा है। क्रिप्टो पर हमारी आपत्ति स्पष्ट है। इसके तमाम घपले सामने आए हैं और लोगों को मैं इस बारे में सावधान करना चाहूंगा कि आरबीआई की ओर से लगातार इस पर दी गई चेतावनी को गंभीरता से लें। इस पर विचार-विमर्श चल रहा है।
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