केंद्र सरकार इलेक्ट्रॉनिक उद्योग को बढ़ावा देकर देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी मेक इन इंडिया के उत्पादों का परचम लहराने की योजना पर आगे बढ़ रही है। इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय डिजिटल इंडिया अभियान की तमाम तस्वीरों को उकेर कर देश में इसका एक पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करने में जुटा है। दोनों क्षेत्रों की गतिविधियों और भविष्य में उठाए जाने वाले कदमों सहित अन्य मुद्दों पर
से बातचीत हुई। पेश है बातचीत के मुख्य अंश :
प्रश्न- इलेक्ट्रॉनिक नीति से किस तरह घरेलू उद्योग को सहायता मिलेगी?
उत्तर - इलेक्ट्रॉनिक नीति और उद्योग मेक इन इंडिया का बहुत बड़ा केंद्र बन रहा है। इस नीति को जल्द ही अंतिम रूप मिलने जा रहा है। आईटी मंत्रालय इसमें इलेक्ट्रॉनिक निर्यात को प्रोत्साहन देने पर विचार कर रहा, ताकि मेक इन इंडिया को प्रोत्साहन मिले और देश ही नहीं, बल्कि पड़ोसी देशों, आसियान और मध्य-पूर्व जैसे बड़े बाजारों तक पहुंच बने। वह दिन दूर नहीं, जब इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की मांग और खपत दोनों बढ़ने वाली है।
अब हमारी कोशिश है कि इस क्षेत्र में भारत को हम निर्यात का भी एक हब बनाएं। हमे विश्वास है कि भारत में निर्मित इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद देश ही नहीं, बल्कि विदेशों की जरूरतों को भी पूरा करेंगे। आने वाले दिनों में देश में 50 करोड़ मोबाइल फोन बनेंगे। जल्द ही प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (पीसीबी) का काम शुरू होने जा रहा है। सरकार की ओर से लावा, सैमसंग समेत अन्य को इसके लिए मंजूरी दी जा चुकी है।
प्रश्न - सीएससी से ग्रामीण क्षेत्र को क्या फायदा है और इसका वास्तविक रूप क्या है?
उत्तर - सामान्य सेवा केंद्र का आंदोलन हमारा बहुत ही आगे बढ़ गया है। जब सरकार आई थी, तब देशभर में महज 83,000 सीएससी थे और आज इनकी संख्या 2.91 लाख हो गई है। ये लगभग 2 लाख ग्राम पंचायतों में हैं, जो जल्द ढाई लाख हो जाएंगे। इनमें 10 लाख लोग काम करते हैं।
ये बैंकिंग, बीमा और डिजिटल शिक्षा का काम कर रहे हैं। हमें दो साल में छह करोड़ लोगों को डिजिटल साक्षर करना है और अब तक एक करोड़ लोगों को साक्षर किया जा चुका है। डिजिटल इंडिया के लिए पूरा पारिस्थितिकी तंत्र तैयार हो रहा है।
देशभर में 232 ई-हॉस्पिटल हैं, जिनमें दो करोड़ मरीज आते हैं। ई-स्कॉलरशिप के तहत करीब दो करोड़ बच्चों को पांच हजार करोड़ रुपये का वजीफा मुहैया कराया गया है। जीवन प्रमाणन जैसी प्रक्रिया लोगों की सहूलियत और सरकार की सहायता व सेवा को सीधे उन तक पहुंचाने के लिए है।