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एयर इंडिया पर सरकार का 325 करोड़ रुपये बकाया, चार कंपनियों ने दिखाई खरीदने में रुचि

Mon, 12 Mar 2018 10:24 AM IST
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सरकारी विमान सेवा को बेचने की पूरी तैयारी कर ली गई है। सूत्रों के मुताबिक एयर इंडिया की बोली लगाने के लिए जेट एयरवेज, एयर फ्रांस-केएलएम और डेल्टा एयरलाइंस ने अपनी रुचि दिखाई है। घाटे में चल रही एयर इंडिया के विनिवेश के लिए सरकार जल्द ही बोली लगाने लिए ‘एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट’ आमंत्रित करेगी।

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सरकार को उम्मीद है कि एयर इंडिया के निजीकरण का काम इस साल पूरा हो जाएगा। इसे चार हिस्सों में बांट कर इसका विनिवेश किया जाएगा और इस पैसे से एयर इंडिया का कर्ज चुकाया जाएगा।

325 करोड़ रुपये का है बकाया
खस्ताहाल एयर इंडिया पर सरकार का ही 325 करोड़ रुपये से ज्यादा बकाया है। यह खुलासा एक आरटीआई से हुआ है। दरअसल विदेश यात्रा पर गए वीवीआईपी के चार्टर्ड फ्लाइट का बिल नहीं चुकाने के कारण बकाया बढ़ कर इतना हो गया है। 
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निजीकरण के कगार पर पहुंच चुकी सरकारी विमानन कंपनी ने सरकार के बकाये बिल का विस्तृत ब्योरा दिया है। सेवानिवृत्त कोमोडोर लोकेश बत्रा ने कहा है कि वीवीआईपी के विदेश दौरे के लंबित बिल के लिए विभिन्न मंत्रालय जिम्मेदार हैं।

आरटीआई के मुताबिक 31 जनवरी, 2018 तक वीवीआईपी की चार्टर्ड फ्लाइट के 325.81 करोड़ रुपये का बिल बकाया है। कुल बकाये बिल में से 84.01 करोड़ रुपये पिछले वित्त वर्ष के हैं, जबकि शेष 241.80 करोड़ रुपये मौजूदा वित्त वर्ष के हैं।

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इन लोगों मिलती है वीवीआईपी फ्लाइट
राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री जैसे वीवीआईपी के विदेश दौरे के लिए एयर इंडिया अपने कमर्शियल जेट को वीवीआईपी यात्रियों की जरूरतों के मुताबिक सुइट में तब्दील करती है। इन चार्टर्ड फ्लाइट के बिलों का भुगतान रक्षा मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, प्रधानमंत्री कार्यालय और कैबिनेट सचिवालय करते हैं।

किस मंत्रालय पर कितना बकाया
एयर इंडिया की ओर से दिए गए जवाब में कहा गया है कि सबसे ज्यादा बकाया (178.55 करोड़) विदेश मंत्रालय का है। उसके बाद कैबिनेट सचिवालय और पीएमओ का 128.84 करोड़ और रक्षा मंत्रालय का 18.42 करोड़ रुपये बकाया है। जवाब में कहा गया है कि कुल बकाया 1004.72 करोड़ रुपये था, जिसमें से सरकार ने 678.91 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया है।
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