केंद्र सरकार देश की दूसरी सबसे बड़ी तेल कंपनी बीपीसीएल के बाद तीन अन्य सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी बेचने जा रही है। इसके लिए सरकार ने बोलियां मंगाई है। जिन कंपनियों के लिए बोली मंगाई है, उनमें भारतीय रेलवे की कंपनी कॉनकोर भी शामिल है।
निजीकरण सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। यही वजह है कि सरकार सार्वजनिक क्षेत्र की चुनिंदा कंपनियों (पीएसयू) में अपनी हिस्सेदारी घटाकर 51 फीसदी से भी कम करने की योजना बनाई है।पीएसयू कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी 51 फीसदी से कम करने के लिए कानूनों में संशोधन करने होंगे और सुनिश्चित करना होगा कि ये कंपनियां केंद्रीय सतर्कता आयोग और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की निगरानी के दायरे से बाहर रहें।
अधिकारी ने कहा कि कैबिनेट ने पूर्व में पीएसयू कंपनियों में कम से कम 51 फीसदी हिस्सेदारी रखने का फैसला किया था और अब कैबिनेट को ही हिस्सेदारी इस स्तर से नीचे ले जाने पर फैसला करना होगा। उन्होंने कहा, ‘सरकार चुनिंदा सार्वजनिक क्षेत्र के केंद्रीय उपक्रमों (सीपीएसई) में हिस्सेदारी 51 फीसदी से कम करने का प्रस्ताव/योजना तैयार कर रही है।’ अधिकारी ने कहा कि यह संभव है, लेकिन इसके लिए कंपनी कानून की धारा 241 में संशोधन की जरूरत होगी।