कर्ज में आकंठ डूबी सरकारी विमानन कंपनी एयर इंडिया को बेचने के लिए गृहमंत्री अमित शाह की अगुवाई वाले मंत्री समूह (जीओएम) ने मंगलवार को सहमति दे दी। मंत्री समूह ने विनिवेश की बोली लगाने के लिए रुचि पत्र (ईओआई) और शेयर खरीद-बिक्री समझौते को भी मंजूरी प्रदान की।
करीब 58 हजार करोड़ के कर्ज में दबी एयर इंडिया को वित्त वर्ष 2018-19 में 8,400 करोड़ रुपये का जबरदस्त घाटा हुआ है। एयर इंडिया को ज्यादा ऑपरेटिंग कॉस्ट और विदेशी मुद्रा में घाटे के चलते भारी नुकसान का सामना करना पड़ा है।
तीन सालों के दौरान एयर इंडिया का घाटा सबसे शीर्ष पर रहा। कंपनी की नेटवर्थ माइनस में 24,893 करोड़ रुपये रही, वहीं नुकसान 53,914 करोड़ रुपये का रहा। भारी उद्योग मंत्री अरविंद गणपत सावंत ने कहा कि पीएसयू विभाग ने रिवाइवल और रिस्ट्रक्चरिंग पर जोर दिया है। सरकार अपनी तरफ से ऐसी कंपनियों में फिर से पैसा कमाने के नए तरीकों पर काम कर रही है।
हाल ही में कंपनी के चेयरमैन व प्रबंध निदेशक अश्विनी लोहानी ने कहा है कि एयर इंडिया के बंद होने की खबरें आधारहीन हैं। उन्होंने कहा था कि एयर इंडिया पहले की ही तरह उड़ान भरती रहेगी और भविष्य में विस्तार भी करेगी। लोहानी ने भरोसा जताया कि यात्रियों, कॉर्पोरेट्स और एजेंटों को चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। राष्ट्रीय विमानन कंपनी अभी भी देश की सबसे बड़ी कंपनी है।